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आपसी सहमति से हुआ ‘मुबारा’ तलाक मान्य: गुजरात हाईकोर्ट ने शादी समाप्त घोषित की

Shivam Y.

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि मुस्लिम कानून में आपसी सहमति से तलाक मान्य है और फैमिली कोर्ट इसे घोषित करने से इनकार नहीं कर सकता। - जमीलभाई फिरोजभाई वहोरा बनाम इल्मा इरफानभाई वहोरा

आपसी सहमति से हुआ ‘मुबारा’ तलाक मान्य: गुजरात हाईकोर्ट ने शादी समाप्त घोषित की
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गुजरात हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि पति-पत्नी आपसी सहमति से मुस्लिम कानून के तहत तलाक (मुबारा) कर लेते हैं, तो फैमिली कोर्ट ऐसे विवाह के समाप्त होने की घोषणा करने से इनकार नहीं कर सकता। अदालत ने नडियाद फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए पति-पत्नी की शादी को वैध रूप से समाप्त घोषित कर दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

मामले में पति ने फैमिली कोर्ट में याचिका दाखिल कर यह घोषणा मांग की थी कि उसकी पत्नी के साथ उसका विवाह समाप्त हो चुका है। दोनों की निकाह 19 मार्च 2022 को मुस्लिम शरिया के अनुसार हुई थी और बाद में इसका पंजीकरण भी कराया गया था।

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शादी के कुछ समय बाद पति पढ़ाई के लिए लंदन चला गया, जबकि पत्नी अपने मायके लौट गई। दोनों के बीच संपर्क बना रहा, लेकिन आपसी मतभेद बढ़ने के कारण दोनों ने अलग होने का फैसला किया।

इसके बाद 20 जून 2022 को दोनों ने गवाहों की मौजूदगी में आपसी सहमति से तलाकनामे पर हस्ताक्षर किए।

पति ने अदालत को बताया कि उसके पासपोर्ट में पत्नी का नाम दर्ज था और वीज़ा नवीनीकरण के लिए विवाह समाप्त होने का अदालत से प्रमाण आवश्यक था।

नडियाद की फैमिली कोर्ट ने पति की याचिका खारिज कर दी।

कोर्ट ने कहा कि:

याचिका पिता के पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से दायर की गई थी।

पत्नी कोर्ट में उपस्थित नहीं हुई।

कुछ दस्तावेज़ों और प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अदालत संतुष्ट नहीं थी।

इन कारणों से फैमिली कोर्ट ने विवाह समाप्त होने की घोषणा देने से इनकार कर दिया।

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पति ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की।

सुनवाई के दौरान पत्नी भी अदालत में उपस्थित हुई और एक हलफनामा दाखिल कर यह स्वीकार किया कि:

उसने 20 जून 2022 को स्वेच्छा से तलाकनामे पर हस्ताक्षर किए थे

तलाक को वह स्वीकार करती है

इसके बाद उसने 1 जनवरी 2024 को दूसरी शादी भी कर ली है

पत्नी ने यह भी कहा कि उसे पति की अपील स्वीकार किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है।

डिवीजन बेंच ने कहा कि मुस्लिम कानून में “मुबारा” (Mutual Divorce) के तहत पति-पत्नी आपसी सहमति से विवाह समाप्त कर सकते हैं।

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अदालत ने कहा:

“मुस्लिम कानून के तहत आपसी सहमति से तलाक के लिए लिखित समझौता अनिवार्य नहीं है। यदि दोनों पक्ष सहमत हों, तो विवाह समाप्त माना जा सकता है।”

बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि फैमिली कोर्ट के पास ऐसे मामलों में विवाह की स्थिति घोषित करने का अधिकार है।

हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए कहा कि 19 मार्च 2022 को हुआ विवाह 20 जून 2022 को हुए आपसी तलाकनामे की तारीख से समाप्त माना जाएगा।

इसके साथ ही पति की अपील स्वीकार कर ली गई और विवाह के विघटन की घोषणा कर दी गई।

Case Title: Jamilbhai Firozbhai Vahora vs Ilma Irfanbhai Vahora

Case Number: First Appeal No. 1900 of 2025

Decision Date: 12 March 2026

Judges: Justice A.Y. Kogje & Justice Nisha M. Thakore

Counsels:

Mr. Ashish M. Dagli for the Appellant

Mr. Parth B. Chauhan for the Respondent

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