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हिमाचल हाईकोर्ट का अहम फैसला: 8 साल पूरे करने पर दैनिक वेतनभोगी को वर्क-चार्ज दर्जा, एरियर नहीं

Vivek G.

भाग चंद बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य, हिमाचल हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि 8 साल की सेवा पूरी करने पर दैनिक वेतनभोगी को वर्क-चार्ज दर्जा मिलेगा, लेकिन एरियर नहीं।

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हिमाचल हाईकोर्ट का अहम फैसला: 8 साल पूरे करने पर दैनिक वेतनभोगी को वर्क-चार्ज दर्जा, एरियर नहीं
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शिमला में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान एक पुराने सेवा विवाद पर फैसला सुनाया गया। अदालत ने साफ किया कि आठ साल की निरंतर सेवा पूरी करने वाले दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी को वर्क-चार्ज दर्जा दिया जाना चाहिए, भले ही बाद में यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई हो। हालांकि, इस दर्जे के साथ केवल काल्पनिक लाभ मिलेंगे, वास्तविक बकाया राशि नहीं।

यह मामला भग चंद बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता ने नियमितीकरण और वर्क-चार्ज दर्जे की मांग की थी।

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मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता भग चंद को वर्ष 1995 में लोक निर्माण विभाग (PWD) में बेलदार के रूप में दैनिक वेतन पर नियुक्त किया गया था। उन्होंने लगातार काम किया और विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार 1995 से 2003 तक हर साल 240 दिनों से अधिक सेवा दी।

हालांकि, उनकी सेवाएं 23 जनवरी 2007 को नियमित की गईं। भग चंद का तर्क था कि आठ साल की निरंतर सेवा पूरी होने पर, यानी 1 जनवरी 2003 से ही उन्हें वर्क-चार्ज दर्जा मिल जाना चाहिए था। उन्होंने समान परिस्थितियों वाले अन्य कर्मचारियों, खासकर सोम दास मामले का हवाला देते हुए समान लाभ की मांग की।

राज्य सरकार ने जवाब में यह स्वीकार किया कि भग चंद ने आवश्यक अवधि तक लगातार काम किया है। लेकिन सरकार का कहना था कि

लोक निर्माण विभाग में वर्क-चार्ज व्यवस्था अगस्त 2005 में समाप्त कर दी गई थी।

इसलिए आठ साल पूरे होने के आधार पर वर्क-चार्ज दर्जा देना अब संभव नहीं है।

सरकार ने इसी आधार पर याचिका का विरोध किया।

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कोर्ट की टिप्पणियां

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति रंजन शर्मा ने रिकॉर्ड, पूर्व फैसलों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का विस्तार से अध्ययन किया। अदालत ने माना कि:

“जब कर्मचारी ने आठ साल की निरंतर सेवा पूरी कर ली थी, तो उसका अधिकार उसी तारीख से उत्पन्न हो गया। बाद में व्यवस्था खत्म होना उस अधिकार को समाप्त नहीं कर सकता।”

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के सूरजमणि और अश्विनी कुमार मामलों का हवाला देते हुए कहा कि वर्क-चार्ज दर्जा देने से इनकार करना कानूनन सही नहीं है।

हालांकि, पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि

“ऐसे मामलों में केवल लाभ दिए जाएंगे, वास्तविक वित्तीय एरियर नहीं।”

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अंतिम फैसला

हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि:

1. भग चंद को 1 जनवरी 2003 से वर्क-चार्ज दर्जा प्रदान किया जाए।

2. वेतन निर्धारण केवल काल्पनिक रूप से किया जाएगा।

3. किसी भी प्रकार का पिछला बकाया या मौद्रिक एरियर देय नहीं होगा।

4. दोनों पक्ष अपने-अपने खर्च स्वयं वहन करेंगे।

इसी के साथ मामला समाप्त कर दिया गया।

Case Title: Bhag Chand vs State of Himachal Pradesh

Case No.: CWPOA No. 731 of 2019

Case Type: Service Matter

Decision Date: 28 October 2025

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