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उहल नदी में गाद छोड़ने पर प्रोजेक्ट जिम्मेदार, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने पर्यावरण बहाली के लिए ₹12 लाख जमा करने का आदेश दिए

Shivam Y.

हिमाचल हाईकोर्ट ने उहल नदी प्रदूषण मामले में शानन प्रोजेक्ट को जिम्मेदार ठहराते हुए ₹12 लाख जमा करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए सख्त निर्देश दिए। - न्यायालय ने स्वयं ही बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य और अन्य।

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उहल नदी में गाद छोड़ने पर प्रोजेक्ट जिम्मेदार, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने पर्यावरण बहाली के लिए ₹12 लाख जमा करने का आदेश दिए
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हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने उहल नदी में बढ़ते प्रदूषण और ट्राउट मछलियों की मौत के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने पाया कि बांध से निकाले गए गाद (सिल्ट) ने नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह जनहित याचिका अदालत ने खुद संज्ञान लेकर शुरू की थी, जब मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र के जरिए जानकारी मिली कि मंडी जिले के बरोट बांध से निकलने वाली गाद नदी की गुणवत्ता खराब कर रही है।

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रिकॉर्ड से सामने आया कि शानन हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट द्वारा बार-बार बिना वैज्ञानिक तरीके के गाद को नदी में छोड़ा जा रहा था, जिससे पानी में गंदलापन बढ़ा और मछलियों के लिए जीवित रहना मुश्किल हो गया।

अदालत ने यह भी नोट किया कि 2018 में इसी तरह के मामले में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि गाद का निस्तारण वैज्ञानिक तरीके से किया जाए, लेकिन इन निर्देशों का पालन नहीं हुआ।

सुनवाई के दौरान अदालत ने विशेषज्ञ रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि गाद से भरा पानी मछलियों के लिए “रेत के तूफान में सांस लेने” जैसा है।

कोर्ट ने पाया कि:

गाद निकालने का काम ट्राउट मछलियों के प्रजनन मौसम (नवंबर से फरवरी) में किया गया

पानी में Total Suspended Solids (TSS) का स्तर 3 mg/L से बढ़कर 2812 mg/L तक पहुंच गया

न्यूनतम 15% पानी छोड़ने के निर्देश का भी पालन नहीं किया गया

अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा,

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“परियोजना संचालक ने अपनी व्यावसायिक सुविधा के लिए पर्यावरण और जलीय जीवन की अनदेखी की है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।”

अदालत ने “Polluter Pays Principle” (प्रदूषक भुगतान सिद्धांत) को लागू करते हुए कहा कि जो भी संस्था पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती है, उसे इसकी भरपाई करनी होगी।

साथ ही, संविधान के अनुच्छेद 51A(g) का हवाला देते हुए कहा गया कि पर्यावरण की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक और संस्था का कर्तव्य है।

हाईकोर्ट ने मामले में कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए:

1 मार्च से पहले किसी भी स्थिति में गाद निकालने की प्रक्रिया नहीं की जाएगी

नदी में पानी के प्रवाह और गाद की मात्रा पर निगरानी के लिए सेंसर लगाए जाएंगे

न्यूनतम 15% जल प्रवाह सुनिश्चित किया जाएगा

एक रिवर मॉनिटरिंग कमेटी गठित की जाएगी

सबसे महत्वपूर्ण आदेश में अदालत ने परियोजना संचालक को निर्देश दिया कि वह ₹12,00,000 की राशि मत्स्य विभाग में जमा करे, जिसका उपयोग ट्राउट मछलियों के पुनर्वास और संरक्षण के लिए किया जाएगा।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना संचालक चाहे तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश के खिलाफ अपील कर सकता है।

Case Details

Case Title: Court on its own motion vs State of Himachal Pradesh & Ors.

Case Number: CWPIL No. 01 of 2025

Judges: Chief Justice G.S. Sandhawalia, Justice Bipin Chander Negi

Decision Date: 08 April 2026

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