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14 साल से अधिक उम्र में 8वीं पास करने पर रोक नहीं: हिमाचल हाईकोर्ट ने PTMTW नियुक्ति चुनौती वाली याचिका खारिज की

Vivek G.
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पंकज चौहान बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य एवं अन्य, हिमाचल हाईकोर्ट ने कहा कि 14 वर्ष से अधिक उम्र में 8वीं पास करना अवैध नहीं है और PTMTW नियुक्ति चुनौती वाली याचिका खारिज कर दी।

14 साल से अधिक उम्र में 8वीं पास करने पर रोक नहीं: हिमाचल हाईकोर्ट ने PTMTW नियुक्ति चुनौती वाली याचिका खारिज की

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि 14 वर्ष से अधिक उम्र में किसी छात्र का 8वीं कक्षा में दाखिला लेना या परीक्षा पास करना कानूनन अवैध नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि केवल उम्र के आधार पर किसी शैक्षणिक प्रमाणपत्र को अवैध नहीं माना जा सकता।

न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें एक उम्मीदवार ने पार्ट टाइम मल्टी टास्क वर्कर (PTMTW) पद पर दूसरे उम्मीदवार की नियुक्ति को चुनौती दी थी।

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मामले की पृष्ठभूमि

मामला जिला सिरमौर के राजकीय प्राथमिक विद्यालय, रजैना में पार्ट टाइम मल्टी टास्क वर्कर की भर्ती से जुड़ा है। भर्ती प्रक्रिया के दौरान निजी प्रतिवादी का चयन 18 अगस्त 2023 को किया गया था।

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याचिकाकर्ता पंकज चौहान ने भी इस चयन प्रक्रिया में भाग लिया था। नियुक्ति से असंतुष्ट होकर उन्होंने आरोप लगाया कि चयनित उम्मीदवार ने 8वीं कक्षा का प्रमाणपत्र अवैध तरीके से प्राप्त किया है।

याचिकाकर्ता का कहना था कि चयनित उम्मीदवार पहले एक सरकारी स्कूल में 8वीं कक्षा में असफल हो चुका था और बाद में एक निजी स्कूल से 2011-12 सत्र में 8वीं कक्षा पास कर ली। उनके अनुसार यह Right to Education Act, 2009 के प्रावधानों के विपरीत है।

इस मुद्दे को लेकर याचिकाकर्ता ने पहले संबंधित प्राधिकरण के समक्ष अपील दायर की थी।

अधिकारियों ने सभी पक्षों को सुनने और रिकॉर्ड देखने के बाद अपील को खारिज कर दिया। आदेश में कहा गया कि प्रस्तुत प्रमाणपत्र वास्तविक है और शिक्षा जारी रखने पर कानून में कोई रोक नहीं है।

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इसके बाद याचिकाकर्ता ने डायरेक्टर, स्कूल एजुकेशन के समक्ष दूसरी अपील दायर की। वहां भी जांच के बाद यह पाया गया कि संबंधित स्कूल के रिकॉर्ड के अनुसार 8वीं कक्षा का प्रमाणपत्र सही है और उसकी सत्यता की पुष्टि भी की जा चुकी है।

हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि निजी प्रतिवादी ने 8वीं कक्षा का प्रमाणपत्र धोखाधड़ी से प्राप्त किया।

उनका कहना था कि जब उम्मीदवार 14 वर्ष की आयु पार कर चुका था, तब उसे 8वीं कक्षा में दाखिला नहीं दिया जाना चाहिए था। इसलिए उसी प्रमाणपत्र के आधार पर की गई नियुक्ति भी अवैध है।

उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि नियुक्ति रद्द कर याचिकाकर्ता को पद पर चयनित किया जाए।

राज्य सरकार की ओर से सहायक महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि संबंधित प्रमाणपत्र की जांच की गई थी।

ब्लॉक एलीमेंट्री एजुकेशन ऑफिसर ने हिमालयन पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल, चंबा के प्राचार्य से प्रमाणपत्र की पुष्टि करवाई थी। स्कूल ने 28 जून 2022 के पत्र में बताया कि प्रमाणपत्र उनके रिकॉर्ड के अनुसार सही है।

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राज्य ने कहा कि याचिकाकर्ता केवल आरोप लगा रहे हैं और उनके पास कोई ठोस सबूत नहीं है।

हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड और दलीलों पर विचार करने के बाद कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर पाए कि 8वीं कक्षा का प्रमाणपत्र फर्जी या अवैध है।

अदालत ने कहा: “Right to Education Act का उद्देश्य 6 से 14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चित करना है। यह कानून किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसने 14 वर्ष पार कर ली हो, स्कूल में पढ़ाई जारी रखने से नहीं रोकता।”

अदालत ने यह भी कहा कि केवल इस आधार पर प्रमाणपत्र को अवैध नहीं माना जा सकता कि छात्र ने 14 वर्ष से अधिक आयु में 8वीं कक्षा पास की।

सभी तथ्यों और रिकॉर्ड की जांच के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता अपने आरोपों को साबित करने में असफल रहे हैं।

अदालत ने दोनों अपीलीय प्राधिकरणों के आदेशों को सही ठहराते हुए कहा कि उनमें कोई कानूनी त्रुटि नहीं है।

इसके साथ ही अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया और लंबित सभी आवेदन भी समाप्त कर दिए।

Case Title: Pankaj Chauhan v. State of Himachal Pradesh & Others

Case No.: CWP No. 20062 of 2025

Decision Date: 27 February 2026

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