Logo

नाबालिग प्रेमिका से शादी की इच्छा और बच्चे के जन्म को देखते हुए पॉक्सो आरोपी को हिमाचल हाईकोर्ट से जमानत

Shivam
Add Court Book as a preferred source on Google

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने POCSO मामले में आरोपी विक्रम सिंह को जमानत दी। पीड़िता ने अदालत से कहा कि वह आरोपी से शादी करना चाहती है और दोनों का एक बच्चा है। - विक्रम सिंह बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य

नाबालिग प्रेमिका से शादी की इच्छा और बच्चे के जन्म को देखते हुए पॉक्सो आरोपी को हिमाचल हाईकोर्ट से जमानत

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने पॉक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार एक युवक को नियमित जमानत देते हुए कहा कि रिकॉर्ड से यह प्रतीत होता है कि आरोपी और पीड़िता के बीच संबंध आपसी प्रेम पर आधारित था, न कि किसी प्रकार के दबाव या जबरदस्ती पर। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि पीड़िता आरोपी से विवाह करना चाहती है और दोनों का एक बच्चा भी है।

यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप शर्मा ने विक्रम सिंह बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले में 15 मई 2026 को पारित किया।

मामले की पृष्ठभूमि

अभियोजन के अनुसार, 19 मार्च 2026 को सिविल अस्पताल ददाहू के एक मेडिकल अधिकारी ने पुलिस को सूचना दी कि एक लड़की को प्रसव के लिए अस्पताल लाया गया है। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि लड़की की जन्मतिथि 24 फरवरी 2008 है, जिससे वह कथित घटनाओं के समय नाबालिग थी।

इसके बाद पुलिस थाना रेणुका जी में भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 और बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम की धारा 6 के तहत एफआईआर दर्ज की गई। आरोपी विक्रम सिंह को 20 मार्च 2026 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह न्यायिक हिरासत में था।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

आरोपी की ओर से अदालत को बताया गया कि दोनों के बीच संबंध सहमति से था और पीड़िता अपनी इच्छा से उसके साथ रह रही थी। यह भी कहा गया कि बच्चे के जन्म के बाद पीड़िता और नवजात आरोपी के घर पर रह रहे हैं तथा दोनों शादी करना चाहते हैं।

राज्य की ओर से जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि पीड़िता घटना के समय नाबालिग थी और मामला पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर कानून से जुड़ा है, इसलिए आरोपी को राहत नहीं दी जानी चाहिए।

सुनवाई के दौरान पीड़िता अपने माता-पिता और आरोपी की मां के साथ अदालत में उपस्थित हुई। उसने अदालत को बताया कि वह आरोपी के साथ “अपनी मर्जी से” गई थी। उसने यह भी कहा कि अस्पताल द्वारा पुलिस को सूचना दिए जाने के बाद ही मामला दर्ज हुआ।

पीड़िता ने अदालत से कहा कि वह मुकदमा आगे नहीं बढ़ाना चाहती और आरोपी से शादी कर अपने बच्चे का पालन-पोषण साथ मिलकर करना चाहती है।

अदालत ने माना कि कानूनन नाबालिग की सहमति का कोई महत्व नहीं होता, लेकिन मामले की परिस्थितियां यह दर्शाती हैं कि संबंध प्रेम के कारण बना था, न कि किसी दबाव या शोषण के कारण।

अदालत ने कहा,

“रिकॉर्ड से प्रतीत होता है कि आरोपी और पीड़िता पहले से एक-दूसरे को जानते थे और विवाह करना चाहते थे।”

न्यायालय ने के. किरुबाकरन बनाम टी.एन. राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि कुछ मामलों में संबंध “वासना नहीं बल्कि प्रेम” पर आधारित होते हैं और ऐसी स्थिति में आरोपी को लंबे समय तक जेल में रखने से परिवार और बच्चे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल लंबा चल सकता है और यदि आरोपी को लगातार जेल में रखा गया तो पीड़िता को बच्चे की परवरिश अकेले करनी पड़ेगी।

इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने विक्रम सिंह को नियमित जमानत दे दी। अदालत ने आरोपी को ₹50,000 के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक स्थानीय जमानती पर रिहा करने का निर्देश दिया।

साथ ही अदालत ने शर्त रखी कि आरोपी जांच और ट्रायल में सहयोग करेगा, गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा और ट्रायल कोर्ट की अनुमति के बिना भारत नहीं छोड़ेगा।

Case Title: Vikram Singh v. State of Himachal Pradesh

Case Number: Cr.MP(M) No. 767 of 2026

Judge: Justice Sandeep Sharma

Decision Date: May 15, 2026

Downlaod Judgment

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates