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मद्रास हाईकोर्ट का निर्णय: टीएनसीएससी के बर्खास्त मौसमी कर्मचारियों को भविष्य की भर्तियों में आयु में छूट के साथ आवेदन करने का अधिकार

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मद्रास हाईकोर्ट ने टीएनसीएससी के बर्खास्त मौसमी कर्मचारियों को भविष्य की भर्तियों में आयु में छूट के साथ आवेदन करने की अनुमति दी, कहा कि भर्ती की खामियों के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

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मद्रास हाईकोर्ट का निर्णय: टीएनसीएससी के बर्खास्त मौसमी कर्मचारियों को भविष्य की भर्तियों में आयु में छूट के साथ आवेदन करने का अधिकार
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एक अहम फैसले में मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने यह स्पष्ट किया है कि तमिलनाडु सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन (टीएनसीएससी) के बर्खास्त मौसमी कर्मचारी भविष्य की भर्तियों में आयु में छूट के साथ भाग लेने के पात्र हैं। न्यायमूर्ति शमीम अहमद ने कहा कि इन कर्मचारियों को चयन प्राधिकरणों की गलती के कारण नुकसान नहीं उठाना चाहिए।

यह मामला महेश्वरन और 20 अन्य कर्मचारियों द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिन्होंने 2018–2019 के धान खरीद सत्र के दौरान मौसमी चौकीदार के रूप में कार्य किया था। उन्हें अगले सत्र में फिर से नहीं बुलाया गया, बल्कि तिरुनेलवेली के श्रमिकों को मदुरै में तैनात किया गया। बाद में 15 फरवरी 2021 के एक आदेश के माध्यम से इनकी नियुक्ति यह कहकर रद्द कर दी गई कि चयन प्रक्रिया उचित दिशा-निर्देशों के अनुसार नहीं की गई थी।

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याचिकाकर्ताओं ने इस बर्खास्तगी को अदालत में चुनौती दी और पुनर्नियुक्ति तथा बकाया वेतन की मांग की। उनके वकील डी. किरुबाकरन ने तर्क दिया कि नियुक्ति सार्वजनिक प्रक्रिया के माध्यम से हुई थी और 1997 में निगम व ट्रेड यूनियनों के बीच हुए समझौते के अनुसार मौसमी कर्मचारियों को भविष्य की भर्तियों में प्राथमिकता और आयु में छूट दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बर्खास्तगी बिना कोई सुनवाई या जांच किए कर दी गई, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

वहीं, टीएनसीएससी की ओर से स्थायी अधिवक्ता जी. मोहनकुमार ने कहा कि याचिकाकर्ता केवल एक सत्र के लिए अस्थायी रूप से नियुक्त किए गए थे और चूंकि भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं थीं, चयन समिति के सदस्यों पर विभागीय कार्रवाई की जा रही है। इसलिए, इन कर्मचारियों को पुनर्नियुक्ति या वेतन की कोई कानूनी मांग नहीं हो सकती।

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अदालत ने कहा, "भर्ती की अनियमितताओं के लिए याचिकाकर्ता जिम्मेदार नहीं हैं। गलती चयन समिति की थी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।"

न्यायमूर्ति शमीम अहमद ने माना कि याचिकाकर्ता अस्थायी रूप से कार्यरत थे और उनकी बर्खास्तगी कानूनी रूप से सही है, लेकिन दोषपूर्ण चयन प्रक्रिया के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा, "यह बर्खास्तगी याचिकाकर्ताओं की प्रतिष्ठा को प्रभावित नहीं करनी चाहिए क्योंकि गलती प्राधिकरणों की थी।"

न्यायालय ने निष्पक्षता पर जोर देते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को भविष्य की सभी भर्ती प्रक्रियाओं में भाग लेने की अनुमति दी जाए। कोर्ट ने कहा, "चूंकि याचिकाकर्ताओं को पूर्व अनुभव है, इसलिए आगामी चयन प्रक्रिया में उन्हें आयु में छूट देना उचित होगा।"

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हालांकि अदालत ने पुनर्नियुक्ति और बकाया वेतन की मांग को खारिज कर दिया, लेकिन यह निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को भविष्य की भर्तियों में स्वतंत्र रूप से, 2018–2019 की दोषपूर्ण प्रक्रिया से प्रभावित हुए बिना, भाग लेने की अनुमति दी जाए। साथ ही टीएनसीएससी को निर्देशित किया गया कि भविष्य में सभी नियुक्तियां निष्पक्ष व पारदर्शी तरीके से, नियमों के अनुरूप की जाएं।

अंत में अदालत ने कहा, "याचिकाकर्ता किसी भी मौद्रिक लाभ के हकदार नहीं होंगे, लेकिन उन्हें भविष्य की भर्तियों में आयु में छूट के साथ आवेदन करने की अनुमति दी जानी चाहिए।"

यह रिट याचिका 7 अप्रैल 2025 को निस्तारित कर दी गई।

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