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'मैं तुम्हारे जैसे 1000 पति रख सकती हूं' - पत्नी की इस टिप्पणी को माना 'गंभीर और अचानक उकसावा', मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पति की सजा घटाई

Shivam
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने माना कि पति ने गंभीर और अचानक उकसावे में आकर ऐसा किया था, इसलिए उसकी सज़ा को IPC की धारा 304 पार्ट II के तहत बदलते हुए सात साल कर दिया गया। - शिव बनाम मध्य प्रदेश राज्य

'मैं तुम्हारे जैसे 1000 पति रख सकती हूं' - पत्नी की इस टिप्पणी को माना 'गंभीर और अचानक उकसावा', मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पति की सजा घटाई

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पत्नी की मौत से जुड़े एक आपराधिक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पति की दोषसिद्धि में संशोधन किया है। अदालत ने कहा कि घटना पूर्व नियोजित हत्या नहीं थी, बल्कि पत्नी की टिप्पणी से उत्पन्न गंभीर और अचानक उकसावे (Grave and Sudden Provocation) का परिणाम थी। इसी आधार पर कोर्ट ने दोषसिद्धि को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304 भाग-I से बदलकर धारा 304 भाग-II के तहत कर दिया और आजीवन कारावास की सजा को घटाकर सात वर्ष की कठोर कैद कर दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह अपील शिवा ने उस फैसले के खिलाफ दायर की थी, जिसमें चौरई, जिला छिंदवाड़ा की अतिरिक्त सत्र अदालत ने 20 जून 2023 को उसे अपनी पत्नी किरण की मृत्यु के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

अभियोजन के अनुसार, 18-19 जुलाई 2021 की रात कुलबहेरी नदी के खर्रा घाट के पास पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ। आरोप था कि विवाद के दौरान शिवा ने पास में पड़े पत्थर से हमला किया, जिससे किरण की मृत्यु हो गई। घटना के बाद शिवा ने स्वयं पुलिस और मृतका के परिजनों को फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी।

अपीलकर्ता की ओर से कहा गया कि अभियोजन के साक्ष्यों में कई विरोधाभास हैं और उसके खिलाफ पर्याप्त विश्वसनीय प्रमाण नहीं हैं। इसलिए ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द किया जाना चाहिए।

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वहीं, राज्य सरकार की ओर से ट्रायल कोर्ट के निर्णय का समर्थन करते हुए कहा गया कि गवाहों, मेडिकल साक्ष्यों और अन्य परिस्थितिजन्य प्रमाणों से आरोपी की भूमिका स्पष्ट रूप से सिद्ध होती है।

हाईकोर्ट की टिप्पणी

डिवीजन बेंच ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों का विश्लेषण करते हुए माना कि आरोपी द्वारा अपनी पत्नी को चोट पहुंचाने और उसकी मृत्यु होने का तथ्य सिद्ध होता है।

हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि घटना अचानक हुए विवाद के दौरान हुई थी और रिकॉर्ड से ऐसा कोई संकेत नहीं मिलता कि आरोपी पहले से हत्या की योजना बनाकर वहां पहुंचा था। अदालत ने इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि घटना के तुरंत बाद आरोपी ने स्वयं पुलिस और मृतका के रिश्तेदारों को फोन कर घटना की जानकारी दी।

कोर्ट ने कहा कि पत्नी द्वारा कथित रूप से यह कहना कि "वह उसके जैसे 1000 पति रख सकती है" ऐसी टिप्पणी थी, जिसने आरोपी को अचानक और गंभीर रूप से उकसाया।

पीठ ने कहा,

"यह गंभीर और अचानक उकसावे (Grave and Sudden Provocation) का मामला है।"

अदालत ने आगे कहा कि यदि आरोपी की पहले से हत्या करने की मंशा होती, तो वह स्वयं पुलिस और मृतका के परिजनों को घटना की सूचना देने वाला पहला व्यक्ति नहीं होता।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का उल्लेख करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में यदि व्यक्ति अचानक उकसावे के कारण आत्मसंयम खो देता है, तो अपराध की प्रकृति का आकलन उसी आधार पर किया जाना चाहिए।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के शरीर पर कई चोटें, पसलियों और स्टर्नम (छाती की हड्डी) में फ्रैक्चर तथा गंभीर आंतरिक चोटों का उल्लेख था।

हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से यह निश्चित रूप से साबित नहीं होता कि आरोपी ने बार-बार पत्थर से हमला किया था। अदालत ने यह भी नोट किया कि घटनास्थल पर कई नुकीले पत्थर मौजूद थे और कुछ चोटें गिरने से भी संभव थीं।

अदालत का फैसला

सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपील आंशिक रूप से स्वीकार कर ली।

अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई धारा 304 भाग-I IPC के तहत दोषसिद्धि को बदलकर धारा 304 भाग-II IPC के तहत कर दिया।

इसके साथ ही आरोपी को सात वर्ष के कठोर कारावास और 1,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना जमा नहीं करने की स्थिति में उसे अतिरिक्त एक वर्ष का कठोर कारावास भुगतना होगा।

इसी के साथ अदालत ने अपील का निस्तारण कर दिया।

Case Details

Case Title: Shiva v. State of Madhya Pradesh

Case Number: Criminal Appeal No. 1863 of 2024

Judge: Justice Vivek Agarwal and Justice Avanindra Kumar Singh

Decision Date: 18 June 2026

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