Logo

वैवाहिक विवाद में पत्नी को नार्को, पॉलीग्राफ या DNA टेस्ट कराने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाई कोर्ट

Shivam
Add Court Book as a preferred source on Google

राजस्थान हाई कोर्ट ने तलाक के एक मामले में पति की उस अर्ज़ी को खारिज कर दिया जिसमें नार्को-एनालिसिस, पॉलीग्राफ, DNA और मेडिकल टेस्ट कराने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि पत्नी को उसकी सहमति के बिना ऐसे टेस्ट करवाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

वैवाहिक विवाद में पत्नी को नार्को, पॉलीग्राफ या DNA टेस्ट कराने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाई कोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि वैवाहिक विवाद के दौरान पत्नी को उसकी इच्छा के विरुद्ध नार्को-एनालिसिस, पॉलीग्राफ, डीएनए या अन्य चिकित्सीय परीक्षण कराने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। अदालत ने उस पति की याचिका खारिज कर दी, जिसने तलाक मामले में अपने ऊपर लगाए गए आरोपों का खंडन करने के लिए ऐसे परीक्षण कराने की मांग की थी।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला पति-पत्नी के बीच चल रहे तलाक विवाद से जुड़ा है। पत्नी ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक की याचिका दायर कर पति के खिलाफ परित्याग, क्रूरता तथा यौन अक्षमता से संबंधित आरोप लगाए थे।

पति ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उसने वैवाहिक संबंध बनाए रखने के लिए प्रयास किए, लेकिन पत्नी साथ रहने को तैयार नहीं थी। पति का यह भी कहना था कि उसके विरुद्ध लगाए गए आरोप झूठे हैं और उसकी छवि खराब करने के उद्देश्य से लगाए गए हैं।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान पति ने एक आवेदन दाखिल कर दोनों पक्षों का संयुक्त मेडिकल परीक्षण, नार्को टेस्ट, पॉलीग्राफ टेस्ट और डीएनए टेस्ट कराने का अनुरोध किया। उसने यह भी कहा कि इन परीक्षणों का पूरा खर्च वह स्वयं वहन करेगा।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

हालांकि पत्नी ने इस आवेदन का विरोध करते हुए कहा कि दोनों पक्षों के साक्ष्य पूरे हो चुके हैं और मामला अंतिम बहस के चरण में पहुंच चुका है। ऐसे में यह आवेदन केवल कार्यवाही को लंबा खींचने के उद्देश्य से दायर किया गया है।

फैमिली कोर्ट ने 15 मई 2026 को पति का आवेदन खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि मामले में साक्ष्य की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है और इस स्तर पर ऐसे परीक्षणों की मांग उचित नहीं है।

इसके बाद पति ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी।

जस्टिस संजीत पुरोहित ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि पति ने अपने साक्ष्य के दौरान कोई चिकित्सीय दस्तावेज या मेडिकल साक्ष्य पेश नहीं किया था, जिससे वह अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों का जवाब दे सके।

अदालत ने कहा कि अतिरिक्त साक्ष्य प्रस्तुत करने या गवाहों को दोबारा बुलाने की शक्ति असाधारण परिस्थितियों में ही प्रयोग की जाती है। इसका उपयोग किसी पक्ष को अपनी कमियों को दूर करने या मुकदमे में देरी करने के लिए नहीं करने दिया जा सकता।

न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा:

“प्रतिवादी पत्नी को उसकी सहमति के बिना ऐसे परीक्षणों से गुजरने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।”

अदालत ने यह भी पाया कि पति यह बताने में विफल रहा कि यौन अक्षमता से जुड़े विवाद में डीएनए टेस्ट, पॉलीग्राफ टेस्ट या नार्को टेस्ट की क्या प्रासंगिकता है।

पति की ओर से सुप्रीम कोर्ट के कुछ निर्णयों का हवाला दिया गया था। हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि उन फैसलों से याचिकाकर्ता को कोई सहायता नहीं मिलती।

अदालत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी किसी पत्नी को उसकी इच्छा के विरुद्ध ऐसे परीक्षण कराने का निर्देश नहीं दिया है। यदि कोई व्यक्ति स्वयं परीक्षण कराने को तैयार हो, तो स्थिति अलग हो सकती है, लेकिन दूसरे पक्ष को मजबूर नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने कहा कि आवेदन ऐसे समय पर दायर किया गया जब मुकदमा अंतिम बहस के लिए तय था। याचिकाकर्ता यह भी नहीं बता सका कि उसने यह मांग पहले क्यों नहीं उठाई।

अदालत ने माना कि आवेदन की प्रकृति और समय को देखते हुए यह प्रतीत होता है कि इसका उद्देश्य कार्यवाही में देरी करना था। न्यायालय ने इसे न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग के रूप में देखा।

हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि पति द्वारा मांगे गए परीक्षण न तो आवश्यक साबित हुए हैं और न ही उनकी प्रासंगिकता स्थापित की गई है। अदालत ने यह भी दोहराया कि पत्नी को उसकी सहमति के बिना ऐसे परीक्षणों के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

इन निष्कर्षों के साथ राजस्थान हाईकोर्ट ने पति की रिट याचिका खारिज कर दी। साथ ही लंबित सभी आवेदन भी निरस्त कर दिए गए।

Case Details:

Case Title: BLJ v. Smt. NJ

Case Number: S.B. Civil Writ Petition No. 12287/2026

Judge: Justice Sanjeet Purohit

Decision Date: June 2, 2026

PDF
Download Order
Free access
Open PDF

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates