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अरावली में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार की खिंचाई की

Vivek G.

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली में अवैध खनन पर हरियाणा सरकार की नाकामी पर नाराज़गी जताई, मुख्य सचिव को दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर 16 जुलाई तक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश।

अरावली में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार की खिंचाई की

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अरावली की पहाड़ियों में, खासकर नूह ज़िले में अवैध खनन गतिविधियों को रोकने में हरियाणा सरकार की विफलता पर कड़ी आलोचना की है।

मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति ए जी मसीह की पीठ ने सरकारी अधिकारियों की भूमिका पर गहरी चिंता जताई, जिनके कारण खनन माफिया बेधड़क अपना काम जारी रख पा रहा है।

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मुख्य न्यायाधीश ने कहा:

“ऐसा प्रतीत होता है कि माफिया अपने सदस्यों को ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार के उन अधिकारियों को भी संरक्षण देने में सक्षम है जिन्होंने उनके साथ मिलीभगत की है।”

इस टिप्पणी से स्पष्ट होता है कि खनन माफिया का प्रभाव सरकार की मशीनरी तक फैला हुआ है, जिससे न सिर्फ माफिया सदस्य बल्कि भ्रष्ट अधिकारी भी बचाव पा रहे हैं।

अदालत को हरियाणा के मुख्य सचिव द्वारा पहले दायर हलफनामे पर विशेष आपत्ति थी, जिसे मुख्य न्यायाधीश ने "टालमटोल भरा" करार दिया। यह हलफनामा दोषी अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं दर्शाता। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य सचिव को 16 जुलाई तक दोषी अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

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सीनियर एडवोकेट के परमेश्वर, जो इस मामले में न्यायालय मित्र (एमिकस क्यूरी) थे, ने केंद्रीय सशक्त समिति (CEC) की रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि खनन माफिया ने राज्य अधिकारियों की मिलीभगत से अरावली वन क्षेत्र में 1.5 किलोमीटर चौड़ी अनधिकृत सड़क का निर्माण कर लिया है। यह सड़क नूह से राजस्थान तक अवैध रूप से खनन की गई पत्थरों की ढुलाई के लिए इस्तेमाल की जा रही थी।

मुख्य न्यायाधीश ने दोहराते हुए कहा कि पर्याप्त साक्ष्यों के बावजूद दोषी अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने फिर कहा:

“ऐसा प्रतीत होता है कि माफिया अपने सदस्यों को ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार के उन अधिकारियों को भी संरक्षण देने में सक्षम है जिन्होंने उनके साथ मिलीभगत की है।”

आगे अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा:

“हमें यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि मुख्य सचिव और नूह के डिप्टी कलेक्टर ने पारिस्थितिकी और पर्यावरण से जुड़े मामलों में लापरवाही बरती है।”

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अदालत ने मुख्य सचिव को दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने और 16 जुलाई तक विस्तृत हलफनामा दायर करने का आदेश दिया।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई को होगी, जब अदालत हरियाणा सरकार द्वारा दिए गए जवाब की समीक्षा करेगी।

केस विवरण : आई.ए. इन आर.ई. : टी.एन. गोदावर्मन थिरुमुलपाड बनाम भारत संघ और अन्य | डब्ल्यू.पी.(सी) संख्या 202/1995

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