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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा धारा 125 CrPC के तहत भरण-पोषण आवेदन की तारीख से शुरू होना चाहिए, पारिवारिक न्यायालय के आदेश में संशोधन किया।

Shivam
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण राशि आवेदन दाखिल करने की तारीख से देय होगी और फैमिली कोर्ट के आदेश में संशोधन किया। - वर्तिका बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा धारा 125 CrPC के तहत भरण-पोषण आवेदन की तारीख से शुरू होना चाहिए, पारिवारिक न्यायालय के आदेश में संशोधन किया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महिला द्वारा दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि भरण-पोषण (maintenance) आवेदन की तारीख से दिया जाना चाहिए, न कि आदेश पारित होने की तारीख से। अदालत ने फैमिली कोर्ट के आदेश में इसी सीमा तक संशोधन किया।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता वर्तिका ने फैमिली कोर्ट, वाराणसी के 17 जून 2025 के आदेश को चुनौती दी थी। फैमिली कोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत पति को ₹15,000 प्रति माह भरण-पोषण देने का निर्देश दिया था। हालांकि यह राशि आदेश की तारीख से देय मानी गई थी।

महिला की ओर से दलील दी गई कि वह अकेले रह रही हैं और अपनी सुरक्षा व दैनिक जरूरतों का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं। यह भी कहा गया कि पति की मासिक आय ₹1.27 लाख से अधिक है, जबकि उन्हें बहुत कम राशि दी गई। याचिका में यह भी कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के राजनेश बनाम नेहा फैसले के अनुसार भरण-पोषण आवेदन दाखिल करने की तारीख से मिलना चाहिए।

वहीं राज्य की ओर से कहा गया कि फैमिली कोर्ट ने सभी परिस्थितियों पर विचार कर आदेश पारित किया था। पति की पहली पत्नी की मृत्यु हो चुकी है और उनके तीन बच्चों की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है, जिनमें एक बच्ची मानसिक उपचार से गुजर रही है।

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न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत ने कहा कि पति की आय में वृद्धि से जुड़ी दलील पहली बार पुनरीक्षण याचिका में उठाई गई है और यह तथ्य निचली अदालत के समक्ष नहीं रखा गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी परिस्थितियों में धारा 127 CrPC के तहत भरण-पोषण राशि बढ़ाने के लिए अलग आवेदन किया जा सकता है।

अदालत ने यह भी कहा कि पुनरीक्षण अदालत की शक्ति सीमित होती है और बाद में बदली परिस्थितियों के आधार पर मूल आदेश की वैधता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।

हालांकि, अदालत ने माना कि फैमिली कोर्ट ने यह बताने का कोई कारण नहीं दिया कि भरण-पोषण आदेश की तारीख से क्यों दिया गया। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के राजनेश बनाम नेहा फैसले का उल्लेख करते हुए कहा,

“भरण-पोषण आवेदन दाखिल करने की तारीख से दिया जाना चाहिए, क्योंकि कार्यवाही लंबित रहने की अवधि आवेदक के नियंत्रण में नहीं होती।”

हाईकोर्ट ने पुनरीक्षण याचिका आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश में संशोधन किया। अदालत ने निर्देश दिया कि महिला को भरण-पोषण आवेदन दाखिल करने की तारीख से ₹15,000 प्रतिमाह की राशि देय होगी, न कि निर्णय की तारीख से।

Case Details

Case Title: Vartika vs State of U.P. and Another

Case Number: Criminal Revision No. 4131 of 2025

Judge: Justice Divesh Chandra Samant

Decision Date: May 15, 2026

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