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साइबर अपराध के संदिग्ध से सिर्फ़ UPI पेमेंट मिलने के आधार पर वेंडर का बैंक अकाउंट फ़्रीज़ करना सही नहीं है: AP हाई कोर्ट

Zaved Khan

आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने SBI को एक शराब व्यापारी का बैंक खाता डीफ्रीज करने का निर्देश दिया और कहा कि केवल संदिग्ध ग्राहक से UPI भुगतान मिलने के आधार पर खाता फ्रीज नहीं किया जा सकता। - Sri Sai Wines v. Union of India & Ors.

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साइबर अपराध के संदिग्ध से सिर्फ़ UPI पेमेंट मिलने के आधार पर वेंडर का बैंक अकाउंट फ़्रीज़ करना सही नहीं है: AP हाई कोर्ट
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आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने एक लाइसेंसधारी शराब विक्रेता को राहत देते हुए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को उसका बैंक खाता तत्काल डीफ्रीज करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि केवल इसलिए किसी व्यापारी का बैंक खाता फ्रीज नहीं किया जा सकता क्योंकि उसके खाते में ₹1,000 की UPI राशि ऐसे व्यक्ति से आई थी, जिसके खिलाफ बाद में धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ। अदालत ने माना कि बिना नोटिस और विधिक प्रक्रिया अपनाए खाते को फ्रीज करना कानून के अनुरूप नहीं था।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता श्री साई वाइन्स आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के नुथक्की गांव में लाइसेंस प्राप्त शराब की दुकान संचालित करता है। व्यवसाय के लिए उसका SBI की मंगलगिरि शाखा में चालू खाता था।

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19 अगस्त 2025 को बैंक ने उसका खाता फ्रीज कर दिया। बाद में उसे पता चला कि यह कार्रवाई बिहार के पटना साइबर सेल के निर्देश पर की गई थी। साइबर सेल एक धोखाधड़ी के मामले की जांच कर रही थी, जिसमें आरोपी द्वारा की गई ₹1,000 की UPI भुगतान राशि व्यापारी के खाते में आई थी। उस समय खाते में ₹8,26,633 जमा थे और खाता फ्रीज होने से उसका पूरा कारोबार प्रभावित हो गया।

याचिकाकर्ता का कहना था कि संबंधित व्यक्ति ने दुकान से ₹1,000 की शराब खरीदी थी और सामान्य व्यापारिक लेनदेन के तहत UPI से भुगतान किया था। बाद में उस व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ, लेकिन उसका स्वयं उस अपराध से कोई संबंध नहीं था।

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अदालत की टिप्पणी

न्यायमूर्ति रवि चीमलापाटी ने कहा कि वर्तमान समय में छोटे व्यापारियों के अधिकांश भुगतान UPI प्लेटफॉर्म जैसे PhonePe और Google Pay के माध्यम से होते हैं।

अदालत ने कहा,

"याचिकाकर्ता की भूमिका की जांच किए बिना और यह देखे बिना कि उसका किसी आपराधिक मामले से कोई संबंध है या नहीं, अधिकारियों द्वारा उसका बैंक खाता फ्रीज नहीं किया जा सकता।"

पीठ ने यह भी कहा कि कोई भी दुकानदार प्रत्येक ग्राहक की पृष्ठभूमि या विश्वसनीयता की जांच करके ही UPI भुगतान स्वीकार नहीं कर सकता। यदि कोई ग्राहक बाद में किसी आपराधिक मामले में आरोपी पाया जाता है, तो केवल उसके भुगतान के आधार पर व्यापारी के खाते को फ्रीज करना उचित नहीं माना जा सकता।

अदालत ने यह भी पाया कि खाते को फ्रीज करने से पहले न तो व्यापारी को कोई नोटिस दिया गया और न ही कोई कारणयुक्त आदेश पारित किया गया। इसलिए यह कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और विधिक प्रक्रिया के विपरीत थी।

अदालत का फैसला

इन परिस्थितियों में हाई कोर्ट ने SBI को याचिकाकर्ता का बैंक खाता संख्या 43461149232 तत्काल डीफ्रीज करने का निर्देश दिया।

साथ ही, अदालत ने पांचवें प्रतिवादी (बरीयारपुर थाना, बिहार के थाना प्रभारी) के विरुद्ध याचिका को, याचिकाकर्ता द्वारा दबाव न देने के कारण, समाप्त कर दिया। मामले में लागत (कॉस्ट) के संबंध में कोई आदेश पारित नहीं किया गया।

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Case Details:

Case Title: Sri Sai Wines v. Union of India & Ors.

Case Number: Writ Petition No. 969 of 2026

Judge: Justice Ravi Cheemalapati

Decision Date: 22 June 2026

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