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फिल्म में रोल दिलाने का वादा कर महिला से संबंध बनाने और निजी वीडियो वायरल करने के आरोपित की अग्रिम जमानत याचिका बॉम्बे हाई कोर्ट ने खारिज की

Shivam
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने फिल्म में काम दिलाने के कथित झांसे और निजी वीडियो वायरल करने के आरोपों वाले मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। - अभिजीत अरुण गाडे बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य।

 फिल्म में रोल दिलाने का वादा कर महिला से संबंध बनाने और निजी वीडियो वायरल करने के आरोपित की अग्रिम जमानत याचिका बॉम्बे हाई कोर्ट ने खारिज की

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक ऐसे मामले में अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है, जिसमें एक व्यक्ति पर फिल्म में काम दिलाने का आश्वासन देकर महिला के साथ संबंध बनाने और बाद में उसके निजी फोटो एवं वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप लगाए गए हैं। अदालत ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए आरोपी की हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला पुणे के नार्हे पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता महिला का आरोप है कि वर्ष 2024 में उसकी मुलाकात आरोपी अभिजीत अरुण गाडे से एक फिल्म के ऑडिशन के सिलसिले में हुई थी। बाद में दोनों के बीच मित्रता बढ़ी।

महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसे फिल्मों में काम दिलाने का भरोसा दिया और इसी आधार पर उसके साथ संबंध बनाए। शिकायत के अनुसार, इस दौरान आरोपी ने उसके कुछ आपत्तिजनक फोटो और वीडियो भी बनाए। महिला का कहना है कि आरोपी ने उन्हें निजी रखने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में उन्हें सार्वजनिक करने की धमकी दी और अंततः सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिया।

मामले में दर्ज एफआईआर के बाद आरोपी ने अग्रिम जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इससे पहले सत्र न्यायालय भी उसकी याचिका खारिज कर चुका था।

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आरोपी की ओर से कहा गया कि दोनों के बीच संबंध सहमति से बने थे और शिकायत में भी इसका उल्लेख है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों के आधार पर हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है।

वहीं, राज्य सरकार और शिकायतकर्ता की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को बताया कि आरोपी ने महिला को फिल्म में अवसर दिलाने का झूठा आश्वासन दिया। यह भी कहा गया कि उसने अपनी शादीशुदा स्थिति छिपाई और बाद में महिला के निजी फोटो एवं वीडियो का दुरुपयोग किया।

न्यायमूर्ति श्याम सी. चांडक ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया शिकायत में लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।

अदालत ने कहा, “एफआईआर से स्पष्ट है कि आवेदक विवाहित था और उसका एक बच्चा भी था, फिर भी उसने यह तथ्य छिपाया और फिल्म में काम दिलाने के बहाने शिकायतकर्ता को संबंध बनाने के लिए प्रेरित किया।”

पीठ ने यह भी कहा कि आरोपों के अनुसार निजी फोटो और वीडियो बनाने तथा बाद में उन्हें सार्वजनिक करने का कोई उचित कारण दिखाई नहीं देता। अदालत के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह विश्वास का दुरुपयोग प्रतीत होता है।

अदालत ने माना कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और संबंधित उपकरणों की बरामदगी के लिए आरोपी की हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।

अपने आदेश में अदालत ने कहा, “अपराध गंभीर प्रकृति का है। अग्रिम जमानत दिए जाने से मामले की निष्पक्ष और प्रभावी जांच प्रभावित हो सकती है।”

इन टिप्पणियों के साथ बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

Case Details

Case Title: Abhijit Arun Gade v. State of Maharashtra & Anr.

Case Number: Anticipatory Bail Application No. 1311 of 2026

Judge: Justice Shyam C. Chandak

Decision Date: June 1, 2026

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