Logo

बॉम्बे हाई कोर्ट, गोवा ने स्पष्ट किया: भारतीय अदालती फैसले 'विदेशी' नहीं हैं, विवाह प्रमाण पत्र रद्द करने का आदेश दिया।

Rajan Prajapati

गोवा हाईकोर्ट ने कहा कि दूसरे राज्य की तलाक डिक्री विदेशी नहीं है और रजिस्ट्रार को विवाह प्रमाणपत्र रद्द करने का निर्देश दिया। - ब्लिनस्टन सैवियो फर्नांडीस बनाम लिएंड्रा मैरी फर्नांडीस

बॉम्बे हाई कोर्ट, गोवा ने स्पष्ट किया: भारतीय अदालती फैसले 'विदेशी' नहीं हैं, विवाह प्रमाण पत्र रद्द करने का आदेश दिया।
Join Telegram

बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि भारत के भीतर किसी अन्य राज्य की अदालत द्वारा दी गई तलाक डिक्री को “विदेशी निर्णय” नहीं माना जा सकता। अदालत ने सब-रजिस्ट्रार द्वारा विवाह प्रमाणपत्र रद्द करने से इनकार को गलत ठहराते हुए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता ब्लिन्सटन सावियो फर्नांडिस ने वर्ष 2019 में बेंगलुरु फैमिली कोर्ट में तलाक के लिए याचिका दायर की थी। यह विवाह 23 दिसंबर 2006 को हुआ था।

मामले में मध्यस्थता (mediation) के बाद 4 जनवरी 2022 को फैमिली कोर्ट, बेंगलुरु ने समझौते के आधार पर विवाह को समाप्त कर दिया।

इसके बाद याचिकाकर्ता ने गोवा के सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में विवाह प्रमाणपत्र रद्द कराने के लिए आवेदन दिया।

हालांकि, रजिस्ट्रार ने यह कहते हुए आवेदन स्वीकार नहीं किया कि बेंगलुरु कोर्ट की डिक्री गोवा के बाहर की है, इसलिए इसे “Foreign Judgment” मानते हुए पहले हाईकोर्ट से पुष्टि (review and confirmation) आवश्यक है।

Read also:- सुप्रीम कोर्ट ने दहेज क्रूरता मामले में ससुर को दोषमुक्त किया, दुल्हन को जलाने के आरोपों में बरी करने के फैसले को बरकरार रखा।

हाईकोर्ट ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया।

पीठ ने साफ शब्दों में कहा कि भारत के भीतर एक राज्य की अदालत द्वारा दिया गया निर्णय “विदेशी निर्णय” नहीं माना जा सकता।

अदालत ने कहा,

“किसी अन्य राज्य की सक्षम अदालत द्वारा पारित डिक्री को विदेशी निर्णय मानना कानून की गलत व्याख्या है।”

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पुर्तगाली सिविल प्रक्रिया संहिता, 1939 के प्रावधानों का उपयोग ऐसे मामलों में नहीं किया जा सकता जहां आदेश भारत की ही अदालत से आया हो।

पीठ ने आगे कहा,

“रजिस्ट्रार द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया अनावश्यक और कानून के विपरीत है, जिससे नागरिकों को अनावश्यक बाधाओं का सामना करना पड़ता है।”

मुख्य प्रश्न यह था कि क्या गोवा में लागू पुर्तगाली सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत, भारत के किसी अन्य राज्य की अदालत के फैसले को “Foreign Judgment” माना जा सकता है?

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि:

भारत के भीतर पारित डिक्री को विदेशी नहीं माना जा सकता

ऐसी डिक्री के लिए अलग से हाईकोर्ट से पुष्टि आवश्यक नहीं

रजिस्ट्रार को सीधे उस डिक्री के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए

अदालत ने रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता के आवेदन पर विचार करते हुए विवाह प्रमाणपत्र रद्द करने की प्रक्रिया पूरी करे।

Read also:- CBI केस में राहत नहीं: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी को वैध ठहराया, रिमांड आदेश बरकरार

साथ ही, कोर्ट ने व्यापक निर्देश जारी किए:

सभी लंबित मामलों में, जहां इसी आधार पर आपत्ति उठाई गई है, उन्हें दो सप्ताह के भीतर निपटाया जाए

राज्य के सभी रजिस्ट्रार इस निर्णय के अनुसार कार्य करें

अनुपालन रिपोर्ट तीन सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट में प्रस्तुत की जाए

अदालत ने आदेश देते हुए कहा,

“रूल को पूर्ण रूप से स्वीकार किया जाता है और याचिका उपरोक्त निर्देशों के साथ निस्तारित की जाती है।”

Case Details

Case Title: Blinston Savio Fernandes vs. Leandra Marie Fernandes

Case Number: Writ Petition No. 265 of 2026

Judges: Justice Valmiki Menezes & Justice Amit S. Jamsandekar

Decision Date: April 29, 2026

Download Judgment

Recommended Posts