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कर्नाटक हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: एक्सेलपॉइंट सिस्टम्स को ₹18.92 लाख GST रिफंड, 'इंटरमीडियरी सेवा' का ठप्पा हटाया

Vivek G.
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मेसर्स एक्सेलपॉइंट सिस्टम्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड बनाम संयुक्त आयुक्त केंद्रीय कर, कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक्सेलपॉइंट सिस्टम्स के पक्ष में फैसला सुनाते हुए इंटरमीडियरी सेवा की दलील खारिज की और ₹18.92 लाख GST रिफंड का आदेश दिया।

कर्नाटक हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: एक्सेलपॉइंट सिस्टम्स को ₹18.92 लाख GST रिफंड, 'इंटरमीडियरी सेवा' का ठप्पा हटाया

बेंगलुरु में सुनवाई के दौरान कर्नाटक हाईकोर्ट ने जीएसटी से जुड़े एक अहम विवाद में एक्सेलपॉइंट सिस्टम्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने टैक्स अधिकारियों के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें कंपनी की सेवाओं को ‘इंटरमीडियरी सर्विस’ मानते हुए रिफंड से इनकार किया गया था। अदालत ने साफ कहा कि कंपनी द्वारा दी गई सेवाएं सेवाओं के निर्यात (Export of Services) की श्रेणी में आती हैं और इसलिए रिफंड देय है।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता कंपनी एक्सेलपॉइंट सिस्टम्स (इंडिया) प्रा. लि. ने अप्रैल 2021 से मार्च 2022 की अवधि के लिए करीब ₹18.92 लाख के इनपुट टैक्स क्रेडिट रिफंड का दावा किया था।

कंपनी का कहना था कि वह अपनी सिंगापुर स्थित पैरेंट कंपनी को मार्केटिंग सपोर्ट और टेक्निकल सपोर्ट सेवाएं प्रदान करती है और ये सेवाएं भारत से बाहर स्थित इकाई को दी गई हैं, जिनका भुगतान विदेशी मुद्रा में हुआ।

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हालांकि, विभागीय अधिकारियों ने इन सेवाओं को IGST अधिनियम की धारा 2(13) के तहत ‘इंटरमीडियरी सेवाएं’ बताते हुए कहा कि इनका प्लेस ऑफ सप्लाई भारत में माना जाएगा। इसी आधार पर रिफंड आवेदन खारिज कर दिया गया, जिसे अपीलीय प्राधिकरण ने भी बरकरार रखा।

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याचिकाकर्ता की दलील

कोर्ट के समक्ष कंपनी ने दलील दी कि वह किसी तीसरे पक्ष के बीच सौदे को “फैसिलिटेट” नहीं कर रही, बल्कि प्रिंसिपल-टू-प्रिंसिपल आधार पर स्वतंत्र सेवाएं दे रही है।

कंपनी ने यह भी कहा कि प्री-जीएसटी दौर में इसी तरह की सेवाओं को लेकर CESTAT पहले ही उसके पक्ष में फैसला दे चुका है और गतिविधियों की प्रकृति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

कोर्ट की टिप्पणियां

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एस.आर. कृष्ण कुमार ने सेवा समझौतों और रिकॉर्ड का गहन परीक्षण किया। अदालत ने कहा कि-

“रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता द्वारा दी गई सेवाएं किसी मुख्य आपूर्ति को ‘अरेंज’ या ‘फैसिलिटेट’ करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये स्वतंत्र सेवाएं हैं, जिन्हें अपनी ओर से प्रदान किया गया है।”

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कोर्ट ने यह भी माना कि ऐसे मामलों में हाल के कई फैसलों-जैसे Amazon Development Centre, Columbia Sportswear और Nokia Solutions-में स्पष्ट किया गया है कि केवल सपोर्ट सेवाएं देना अपने-आप में ‘इंटरमीडियरी’ नहीं बनाता।

अदालत का फैसला

सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने-

• एडजुडिकेशन अथॉरिटी और अपील अथॉरिटी के आदेशों को रद्द कर दिया

• सेवाओं को Export of Services माना

• विभाग को निर्देश दिया कि ₹18,92,697 की रिफंड राशि लागू ब्याज सहित याचिकाकर्ता को दी जाए

कोर्ट ने यह भी कहा कि रिफंड की प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी की जाए।

Case Title: M/s Excelpoint Systems (India) Pvt. Ltd. vs Joint Commissioner of Central Tax

Case No.: W.P. No. 25598 of 2024

Case Type: Writ Petition (GST Refund)

Decision Date: 27 November 2025

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