Logo

कर्नाटक हाईकोर्ट ने Shaadi.com बलात्कार मामले में बरी के फैसले पर पुनर्विचार से इनकार किया

Shivam
Add Court Book as a preferred source on Google

कर्नाटक राज्य बनाम अबू सलमान सैफन सब थंबे और अन्य - कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सबूतों की कमी और सहमतिपूर्ण संबंध का हवाला देते हुए, Shaadi.com बलात्कार मामले में राज्य की अपील खारिज कर दी और बरी करने के फैसले को बरकरार रखा।

कर्नाटक हाईकोर्ट ने Shaadi.com बलात्कार मामले में बरी के फैसले पर पुनर्विचार से इनकार किया

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक संवेदनशील आपराधिक मामले में राज्य की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के बरी करने के फैसले को बरकरार रखा। अदालत ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले में हस्तक्षेप का कोई ठोस कारण नहीं बनता।

यह फैसला कर्नाटक हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सुनाया, जिसमें जस्टिस एच.पी. संदीश और जस्टिस वेंकटेश नाइक टी शामिल थे।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला एक महिला की शिकायत से शुरू हुआ, जिसने आरोप लगाया कि मार्च 2020 में Shaadi.com के माध्यम से वह आरोपियों में से एक के संपर्क में आई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोनों लगभग तीन महीने तक संपर्क में रहे। महिला ने दावा किया कि कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान, मई 2020 में रमज़ान की पूर्व संध्या पर, आरोपी उसे बेंगलुरु स्थित अपने घर ले गया, चार दिनों तक उसे बंधक बनाकर रखा और शादी का झूठा वादा करके बार-बार उसका बलात्कार किया।

Read also:- सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: स्कूलों में सैनिटरी पैड और अलग शौचालय लड़कियों का मौलिक अधिकार

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

केंगेरी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई और भारतीय दंड संहिता की धारा 34 के साथ धारा 354 (लज्जा भंग करना), 376 (बलात्कार), 420 (धोखाधड़ी), 504 और 506 (जानबूझकर अपमान और आपराधिक धमकी) के तहत आरोप तय किए गए।

दिसंबर 2023 में, सत्र न्यायालय ने ठोस सबूतों की कमी और अभियोजन पक्ष के मामले में विसंगतियों का हवाला देते हुए आरोपी को बरी कर दिया।

अदालत की टिप्पणियां

राज्य की ओर से पेश हुए सरकारी वकील ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने सबूतों का सही मूल्यांकन नहीं किया। उनका कहना था कि मेडिकल रिपोर्ट में भले ही बाहरी चोटें न हों, लेकिन यह तथ्य कि पीड़िता की हाइमन फटी हुई थी, गंभीर संकेत देता है।

हालांकि, हाईकोर्ट ने इस तर्क से सहमति नहीं जताई। बेंच ने कहा,

“ट्रायल कोर्ट ने मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों का विस्तार से विश्लेषण किया है और उसके निष्कर्षों को पूरी तरह मनमाना नहीं कहा जा सकता।”

Read also:- ईडी की गिरफ्तारी वैध: रियल एस्टेट कंपनी के प्रमोटरों की याचिकाएं हाईकोर्ट ने खारिज कीं

अदालत ने यह भी नोट किया कि पीड़िता ने खुद यह स्वीकार किया था कि वह आरोपी से शादी नहीं करना चाहती थी। साथ ही, शिकायत दर्ज करने में हुई देरी और सोशल मीडिया पर उसकी सक्रियता को भी अदालत ने संदेह के बिंदु के रूप में देखा।

डॉक्टर की गवाही में यह सामने आया कि पीड़िता के शरीर या निजी अंगों पर किसी प्रकार की चोट नहीं पाई गई। पड़ोसियों और अन्य गवाहों के बयान भी घटना के स्थान और परिस्थितियों को लेकर एक-दूसरे से मेल नहीं खाते थे।

हाईकोर्ट ने सत्र अदालत की उस टिप्पणी को भी दोहराया जिसमें कहा गया था कि यदि शारीरिक संबंध हुए भी हों, तो रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों से उन्हें जबरन नहीं माना जा सकता।

Read also:- ऑटिज़्म में स्टेम सेल थेरेपी पर सुप्रीम कोर्ट की सख़्त टिप्पणी, अवैज्ञानिक इलाज को बताया अनैतिक

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि सहमति से बने संबंध, बिना धोखे या गलत धारणा के, बलात्कार की श्रेणी में नहीं आते। बेंच ने कहा कि पीड़िता की गवाही “पूरी तरह भरोसेमंद नहीं लगती।”

निर्णय

सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य की अपील स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि बरी करने के फैसले में दखल देने का कोई कानूनी आधार नहीं है और इस प्रकार अपील को खारिज कर दिया गया।

Case Title: State of Karnataka vs. Abu Salman Saifan Sab Thambe & Anr.

Case Number: Criminal Appeal No. 812 of 2025

Date of Judgment: 9 January 2026

Download Judgment

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates