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अभियुक्तों द्वारा वास्तविक पश्चाताप, शिक्षा और अनुपालन प्रदर्शित करने के बाद मद्रास उच्च न्यायालय ने एससी/एसटी अधिनियम के तहत दायर मामले को रद्द कर दिया।

Shivam Y.

मद्रास हाईकोर्ट ने अंबेडकर पोस्टर अपमान मामले में सुधारात्मक कदमों और समझौते के आधार पर आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया। - जी. राजेश उर्फ ​​राजेशकुमार और अन्य बनाम तमिलनाडु राज्य

अभियुक्तों द्वारा वास्तविक पश्चाताप, शिक्षा और अनुपालन प्रदर्शित करने के बाद मद्रास उच्च न्यायालय ने एससी/एसटी अधिनियम के तहत दायर मामले को रद्द कर दिया।
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मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने एक संवेदनशील मामले में पारंपरिक सजा के बजाय सुधारात्मक न्याय का रास्ता अपनाते हुए आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया। मामला डॉ. बी.आर. अंबेडकर की तस्वीर के कथित अपमान से जुड़ा था, जिसमें समझौते के आधार पर केस खत्म करने की मांग की गई थी।

मामले की पृष्ठभूमि

प्रॉसिक्यूशन के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि अंबेडकर जयंती के अवसर पर लगाए गए पोस्टर को एक आरोपी ने फाड़कर उस पर अपमानजनक कृत्य किया, जबकि दूसरे आरोपी ने उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया।

इस घटना के आधार पर एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत FIR दर्ज हुई और मामला ट्रायल कोर्ट में लंबित था। बाद में पक्षकारों के बीच समझौता हो गया और आरोपियों ने हाईकोर्ट से कार्यवाही रद्द करने की मांग की।

कोर्ट ने सीधे समझौते को स्वीकार नहीं किया। न्यायालय ने कहा कि मामला केवल निजी विवाद नहीं बल्कि सामाजिक और संवैधानिक महत्व से जुड़ा है।

अदालत ने कहा,

“डॉ. अंबेडकर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि संविधान के मूल्यों का प्रतीक हैं। उनके प्रति अपमान समाज के व्यापक ताने-बाने को प्रभावित करता है।”

कोर्ट ने आरोपियों को सिर्फ माफी मांगने से आगे बढ़कर कुछ विशेष निर्देश दिए:

अंबेडकर के जीवन पर 101 किताबें खरीदना

स्वयं पढ़ना और 100 छात्रों को वितरित करना

स्कूल से प्रमाण लेना

अदालत के सामने मौखिक परीक्षा देना

₹5,000 का दान करना

बाद में अदालत ने पाया कि आरोपियों ने इन सभी निर्देशों का पालन किया और अंबेडकर के विचारों को समझने का प्रयास किया।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी नोट किया कि आरोपियों का कृत्य “अज्ञानता और अपरिपक्वता” से जुड़ा था, और उन्होंने वास्तविक पश्चाताप दिखाया।

पीठ ने कहा,

“यह मामला अब केवल समझौते का नहीं, बल्कि वास्तविक सुधार और आत्मचिंतन का उदाहरण बन गया है।”

अदालत ने राज्य सरकार को भी निर्देश दिया कि स्कूल पाठ्यक्रम में डॉ. अंबेडकर के जीवन, संविधान निर्माण में उनकी भूमिका और उनके विचारों को शामिल किया जाए, ताकि छात्रों में संवैधानिक जागरूकता बढ़ सके।

कोर्ट ने सभी तथ्यों, समझौते, और आरोपियों के सुधारात्मक प्रयासों को ध्यान में रखते हुए ट्रायल कोर्ट में लंबित आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

अदालत ने कहा,

“इस मामले में न्याय का उद्देश्य दंड से आगे बढ़कर सुधार के माध्यम से पूरा हो चुका है, इसलिए कार्यवाही जारी रखना उचित नहीं होगा।”

Case Details

Case Title: G. Rajesh @ Rajeshkumar & Anr vs State of Tamil Nadu

Case Number: Crl.O.P.(MD) No.22813 of 2025

Judge: Justice L. Victoria Gowri

Decision Date: 30 April 2026

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