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पीड़िता द्वारा आरोपी से शादी और गर्भावस्था को देखते हुए कर्नाटक हाई कोर्ट ने POCSO व रेप केस रद्द किया, कहा- मुकदमा जारी रखना पारिवारिक जीवन के हित में नहीं

Shivam Y.

कर्नाटक हाई कोर्ट ने POCSO और रेप मामले की कार्यवाही रद्द कर दी, क्योंकि पीड़िता बालिग होने के बाद आरोपी से शादी कर चुकी है और अब गर्भवती है। - शिवराज पुत्र बसप्पा नदुविनकेरी बनाम कर्नाटक राज्य

पीड़िता द्वारा आरोपी से शादी और गर्भावस्था को देखते हुए कर्नाटक हाई कोर्ट ने POCSO व रेप केस रद्द किया, कहा- मुकदमा जारी रखना पारिवारिक जीवन के हित में नहीं
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कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक POCSO और दुष्कर्म मामले में चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मामले की परिस्थितियां असाधारण हैं क्योंकि पीड़िता अब आरोपी से शादी कर चुकी है, गर्भवती है और खुद केस खत्म करने की मांग कर रही है।

न्यायमूर्ति गीता के.बी. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत शिवराज पुत्र बसप्पा नदुविनकेरी द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया।

मामले की पृष्ठभूमि

पुलिस के अनुसार, अप्रैल 2024 में आरोपी कथित तौर पर नाबालिग लड़की को उसके घर से लेकर गया था। आरोप था कि उसके साथ कई बार यौन संबंध बनाए गए। इस आधार पर आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 363 और 376(2)(N) के साथ POCSO Act की धारा 4 और 6 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि कथित घटना के समय पीड़िता की उम्र 17 साल 11 महीने 21 दिन थी, यानी वह बालिग होने से सिर्फ 9 दिन दूर थी।

कोर्ट को यह भी बताया गया कि पीड़िता ने बालिग होने के बाद 25 मई 2025 को आरोपी से शादी कर ली थी और विवाह का पंजीकरण भी हो चुका है।

पीड़िता खुद कोर्ट में उपस्थित हुई और उसने कहा कि वह आरोपी के साथ खुशहाल वैवाहिक जीवन जी रही है। उसने यह भी बताया कि वह गर्भावस्था के आठवें महीने में है और नहीं चाहती कि उसके पति के खिलाफ आपराधिक मामला जारी रहे।

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि ट्रायल के दौरान गवाही देते समय पीड़िता ने अभियोजन के आरोपों का समर्थन नहीं किया था।

जस्टिस गीता के.बी. ने कहा कि POCSO Act के अपराध भले ही गैर-समझौतायोग्य हों, लेकिन हाई कोर्ट अपने अंतर्निहित अधिकारों का इस्तेमाल करके न्यायहित में कार्यवाही रद्द कर सकता है।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यदि मुकदमा जारी रखने से न्याय की बजाय केवल पक्षकारों का नुकसान हो, तो हाई कोर्ट हस्तक्षेप कर सकता है।

कोर्ट ने कहा, “पीड़िता ने स्वयं निर्णय लिया है कि वह याचिकाकर्ता के साथ रहना चाहती है।” अदालत ने यह भी माना कि दोनों अब विवाहित जीवन जी रहे हैं और जल्द ही बच्चे के माता-पिता बनने वाले हैं।

अदालत ने कहा कि ऐसे में मुकदमा जारी रखना परिवार के शांतिपूर्ण भविष्य को प्रभावित करेगा और इससे कोई सार्थक उद्देश्य पूरा नहीं होगा।

हाई कोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए शिराहट्टी पुलिस स्टेशन के Crime No.60/2024 और उससे जुड़े सत्र मामले की पूरी कार्यवाही रद्द कर दी।

Case Details

Case Title: Shivaraj S/O Basappa Naduvinkeri vs The State of Karnataka

Case Number: Criminal Petition No. 100997 of 2026

Judge: Justice Geetha K.B.

Decision Date: 26 May 2026

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