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केवल शादी में रुचि खत्म हो जाने से तलाक नहीं मिल सकता, विवाह कोई अनुबंध नहीं जिसे इच्छा से तोड़ा जाए: कर्नाटक हाई कोर्ट

Shivam Y.

कर्नाटक हाईकोर्ट ने पति की तलाक अपील खारिज करते हुए कहा कि केवल विवाह में रुचि खत्म हो जाना तलाक का आधार नहीं है और कोई व्यक्ति अपने ही आचरण का लाभ नहीं उठा सकता।

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केवल शादी में रुचि खत्म हो जाने से तलाक नहीं मिल सकता, विवाह कोई अनुबंध नहीं जिसे इच्छा से तोड़ा जाए: कर्नाटक हाई कोर्ट
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने 21 वर्ष पुराने विवाह को समाप्त करने से इनकार करते हुए कहा कि केवल इस आधार पर तलाक नहीं दिया जा सकता कि पति या पत्नी अब विवाह में रुचि नहीं रखते। अदालत ने स्पष्ट किया कि कोई भी पक्ष अपने ही आचरण का लाभ उठाकर तलाक की डिक्री प्राप्त नहीं कर सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

यह अपील मैसूर के III अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें पति की हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1A) के तहत दायर तलाक याचिका खारिज कर दी गई थी। दोनों की शादी वर्ष 2003 में प्रेम विवाह और अंतरजातीय विवाह के रूप में हुई थी। उनके एक बेटी भी है, जो अब लगभग वयस्क हो चुकी है।

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इससे पहले पति ने तलाक की याचिका दायर की थी, जबकि पत्नी ने वैवाहिक संबंधों की बहाली (Restitution of Conjugal Rights) के लिए याचिका दाखिल की थी। फैमिली कोर्ट ने पत्नी की याचिका स्वीकार करते हुए पति की तलाक याचिका खारिज कर दी थी।

बाद में पति ने फिर से यह कहते हुए तलाक मांगा कि अदालत के पहले आदेश के बावजूद दोनों साथ नहीं रह पाए और लंबे समय से अलग-अलग रह रहे हैं। उनका कहना था कि विवाह पूरी तरह टूट चुका है।

वहीं, पत्नी ने इन आरोपों से इनकार किया। उसने कहा कि उसने हमेशा पति और उनके माता-पिता की देखभाल की, कभी अलग रहने की जिद नहीं की और वैवाहिक जीवन निभाने का पूरा प्रयास किया।

जस्टिस डी. के. सिंह और जस्टिस टी. एम. नदाफ की खंडपीठ ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि फैमिली कोर्ट ने सही पाया था कि पति पत्नी के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित नहीं कर सके।

अदालत ने यह भी नोट किया कि जिरह के दौरान स्वयं पति ने स्वीकार किया था कि उन्होंने वैवाहिक जीवन दोबारा शुरू नहीं किया क्योंकि अब उनकी उसमें कोई रुचि नहीं थी।

खंडपीठ ने कहा, "अपीलकर्ता अपने ही गलत आचरण का लाभ उठाना चाहता है।"

अदालत ने आगे कहा, "हिंदू कानून के तहत विवाह एक संस्कार है, कोई अनुबंध नहीं। विवाह के बाद केवल इस आधार पर कि किसी एक पक्ष की विवाह में रुचि नहीं रही, वह विवाह से अलग होने का अधिकार नहीं मांग सकता।"

हाईकोर्ट ने माना कि फैमिली कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। इसी के साथ अदालत ने पति की अपील खारिज कर दी और लंबित सभी अंतरिम आवेदनों का भी निस्तारण कर दिया।

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Case Details

Case Title: M. v. B. M B

Case Number: MFA No. 4343 of 2026

Judge: Justice D. K. Singh and Justice T. M. Nadaf

Decision Date: 15 July 2026

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