कर्नाटक हाईकोर्ट ने कोडागु स्थित एक होमस्टे के मालिक की उस याचिका पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया, जिसमें उसने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर और गिरफ्तारी को चुनौती दी है। मामला एक अमेरिकी महिला पर्यटक के साथ कथित यौन उत्पीड़न से जुड़ा है।
न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने कहा कि बिना जांच दस्तावेजों को देखे कार्यवाही पर रोक नहीं लगाई जा सकती। अदालत ने राज्य सरकार को अब तक की पूरी जांच फाइल पेश करने का निर्देश दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि
अभियोजन के अनुसार, अप्रैल 2026 में एक अमेरिकी पर्यटक को कोडागु के एक होमस्टे में कथित रूप से नशीला पेय पदार्थ दिया गया, जिसके बाद वहां कार्यरत एक कर्मचारी ने उसके साथ यौन अपराध किया। इस मामले में आरोपी कर्मचारी को गिरफ्तार किया जा चुका है और वह न्यायिक हिरासत में है।
होमस्टे मालिक पालेकांडा पोनप्पा को भी 19 अप्रैल को इस आरोप में गिरफ्तार किया गया था कि उसने घटना से जुड़ी जानकारी अधिकारियों से छिपाई। बाद में उसे जमानत मिल गई।
अब पोनप्पा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर एफआईआर रद्द करने और कथित अवैध गिरफ्तारी के लिए 15 लाख रुपये मुआवजे की मांग की है।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अंगद कामथ ने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी से पहले और बाद में प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों ने उनके मुवक्किल को ऐसे व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया मानो उसे घटना की पूर्व जानकारी थी, जबकि शिकायत में ऐसा कोई आरोप नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य रिकॉर्ड जांच एजेंसी को उपलब्ध कराए गए हैं, जो याचिकाकर्ता के पक्ष का समर्थन करते हैं। बचाव पक्ष का कहना था कि शिकायतकर्ता के बयान में भी होमस्टे मालिक की प्रत्यक्ष भूमिका का उल्लेख नहीं है।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नागप्रसन्ना ने मामले की गंभीरता पर जोर दिया।
अदालत ने कहा, “यह ऐसा मामला नहीं है जिसमें मैं तुरंत सामान्य रूप से पूरी कार्यवाही पर रोक लगा दूं। पहले मैं जांच के दस्तावेज देखना चाहता हूं।”
पीठ ने आगे कहा, “यदि किसी दूसरे देश की नागरिक के साथ यहां दुष्कर्म हुआ है, तो यह अत्यंत गंभीर मामला है।”
जब याचिकाकर्ता की ओर से 15 लाख रुपये के मुआवजे की मांग का उल्लेख किया गया, तो अदालत ने टिप्पणी की, “आप चाहते क्या हैं? क्या आप होमस्टे की मरम्मत कराना चाहते हैं?”
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच रिकॉर्ड देखने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का दावा प्रथम दृष्टया बनता है या नहीं।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने फिलहाल एफआईआर या जांच प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने राज्य के अतिरिक्त विशेष लोक अभियोजक को निर्देश दिया कि अब तक की पूरी जांच फाइल अदालत के समक्ष पेश की जाए।
मामले की अगली सुनवाई 10 जून 2026 को निर्धारित की गई है, जब अदालत जांच रिकॉर्ड का अवलोकन करेगी और याचिका पर आगे विचार करेगी।
Case Details
Case Title: Palecanda Ponnappa @ Vishal v. State of Karnataka & Anr.
Case Number: CRL.P. No. 7712/2026
Judge: Justice M. Nagaprasanna
Decision Date: June 8, 2026





