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कर्नाटक उच्च न्यायालय के अनुसार, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत अंतिम आदेश के बाद अंतरिम भरण-पोषण जारी नहीं रह सकता।

Shivam
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि एक ही अवधि के लिए दो अलग-अलग मामलों में मेंटेनेंस नहीं दिया जा सकता, अंतिम आदेश को प्राथमिकता दी जाएगी। - श्री रमेश एन बनाम श्रीमती। रक्षा एम @ श्रुति

कर्नाटक उच्च न्यायालय के अनुसार, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत अंतिम आदेश के बाद अंतरिम भरण-पोषण जारी नहीं रह सकता।

बेंगलुरु स्थित कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि पति पर एक ही अवधि के लिए अलग-अलग मामलों में दोहरा मेंटेनेंस (भरण-पोषण) नहीं थोपा जा सकता। अदालत ने कहा कि जब एक मामले में अंतिम रूप से मेंटेनेंस तय हो चुका है, तो समानांतर अंतरिम आदेश जारी रखना कानूनन उचित नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला पति श्री रमेश एन और पत्नी श्रीमती रक्ष एम @ श्रुति के बीच वैवाहिक विवाद से जुड़ा है। दोनों की शादी 23 नवंबर 2020 को हुई थी। पत्नी ने आरोप लगाया कि शादी के तुरंत बाद अतिरिक्त दहेज की मांग की गई और उसे मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।

पत्नी ने बाद में अलग रहना शुरू कर दिया और अपने भरण-पोषण के लिए दो अलग-अलग कानूनी रास्ते अपनाए-

• एक, हिंदू विवाह अधिनियम के तहत अंतरिम मेंटेनेंस

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• दूसरा, दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 के तहत नियमित मेंटेनेंस

परिवार न्यायालय, तुमकुरु ने 21 नवंबर 2025 को ₹10,000 प्रति माह मेंटेनेंस तय किया। वहीं, बेंगलुरु की फैमिली कोर्ट ने पहले ही अंतरिम रूप से ₹10,000 प्रति माह और ₹20,000 मुकदमे के खर्च के रूप में देने का आदेश दिया था।

न्यायमूर्ति डॉ. के. मनमधा राव ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अंतरिम और अंतिम मेंटेनेंस का उद्देश्य अलग-अलग होता है।

अदालत ने कहा,

“धारा 24 के तहत दिया गया अंतरिम मेंटेनेंस केवल अस्थायी सहायता है, जबकि धारा 125 CrPC के तहत तय मेंटेनेंस साक्ष्यों के आधार पर अंतिम निर्धारण होता है।”

कोर्ट ने आगे यह भी जोड़ा कि,

“एक ही अवधि के लिए दो समानांतर आदेश लागू रहने से वित्तीय बोझ का दोहराव होगा, जो कानून में स्वीकार्य नहीं है।”

हालांकि, अदालत ने यह भी माना कि मुकदमे के खर्च (litigation expenses) अलग प्रकृति के होते हैं और उन्हें जारी रखना न्यायसंगत है।

हाईकोर्ट ने पति द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी और ₹10,000 प्रति माह का मेंटेनेंस (CrPC धारा 125 के तहत) बरकरार रखा।

साथ ही, अदालत ने-

• अंतरिम मेंटेनेंस के आदेश को रद्द कर दिया

• ₹20,000 मुकदमे के खर्च का आदेश कायम रखा

• निर्देश दिया कि अंतिम निर्णय के समय पहले से दिए गए मेंटेनेंस का समायोजन किया जाए

अदालत ने कहा कि अब केवल धारा 125 CrPC के तहत तय मेंटेनेंस ही लागू होगा।

Case Details

Case Title: Sri Ramesh N vs Smt. Raksha M @ Shruthi

Case Number: RPFC No. 15 of 2026 c/w WP No. 8159 of 2024

Judge: Justice K. Manmadha Rao

Decision Date: April 17, 2026

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