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तेलंगाना उच्च न्यायालय ने ट्रेन से गिरने से हुई मौत के मामले में 8 लाख रुपये का मुआवजा मंजूर किया, न्यायाधिकरण द्वारा खारिज किए गए फैसले को रद्द किया।

Rajan Prajapati

हाईकोर्ट ने रेलवे टेंडर विवाद में याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्रक्रिया नियमों के अनुसार थी और प्रशासनिक फैसलों में हस्तक्षेप जरूरी नहीं। - रवि और अन्य बनाम भारत संघ

तेलंगाना उच्च न्यायालय ने ट्रेन से गिरने से हुई मौत के मामले में 8 लाख रुपये का मुआवजा मंजूर किया, न्यायाधिकरण द्वारा खारिज किए गए फैसले को रद्द किया।
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रेलवे से जुड़े एक अहम ठेका विवाद में उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक निर्णयों में अदालत सीमित दखल ही करेगी, खासकर तब जब प्रक्रिया नियमों के अनुसार अपनाई गई हो। अदालत ने याचिकाकर्ता की चुनौती को खारिज करते हुए विभाग के फैसले को बरकरार रखा।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला रेलवे विभाग द्वारा जारी एक टेंडर से जुड़ा था, जिसमें याचिकाकर्ता कंपनी ने भाग लिया था। कंपनी का दावा था कि उसने सभी शर्तों का पालन किया, लेकिन तकनीकी कारणों का हवाला देकर उसकी बोली को अस्वीकार कर दिया गया।

याचिकाकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए आरोप लगाया कि यह फैसला मनमाना और पक्षपातपूर्ण था। उनका कहना था कि समान परिस्थितियों में अन्य बोलीदाताओं को राहत दी गई, जबकि उनके साथ भेदभाव किया गया।

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याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी थी। उन्होंने कहा,

“प्राधिकरण ने बिना पर्याप्त कारण बताए हमारे क्लाइंट की बोली को खारिज कर दिया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।”

उन्होंने यह भी कहा कि यदि कुछ तकनीकी कमियां थीं, तो उन्हें सुधारने का अवसर दिया जाना चाहिए था।

रेलवे प्रशासन की ओर से पेश वकील ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया तय नियमों के तहत की गई।

उन्होंने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता की बोली आवश्यक तकनीकी मानकों को पूरा नहीं करती थी, और इसलिए उसे अस्वीकार करना अनिवार्य था।

प्राधिकरण की ओर से कहा गया,

“टेंडर की शर्तें सभी के लिए समान थीं और उनका सख्ती से पालन किया गया।”

सुनवाई के दौरान अदालत ने टेंडर प्रक्रिया के दस्तावेजों का विस्तार से अध्ययन किया। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता की बोली में कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी खामियां थीं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था।

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अदालत ने कहा,

“न्यायालय टेंडर प्रक्रिया में तभी हस्तक्षेप करता है जब स्पष्ट रूप से मनमानी या कानून का उल्लंघन हो। यहां ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया।”

बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक निर्णयों में अदालत अपनी राय नहीं थोप सकती, जब तक कि प्रक्रिया पूरी तरह गलत या भेदभावपूर्ण साबित न हो।

सभी पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि रेलवे प्रशासन का निर्णय नियमों के अनुरूप है और इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता या पक्षपात नहीं पाया गया।

Case Details

Case Title: Ravi & Another v. Union of India

Case Number: Civil Miscellaneous Appeal No. 318 of 2022

Judge: Justice Vakiti Ramakrishna Reddy

Decision Date: 08 April 2026

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