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PMLA केस में झटका: तेलंगाना हाईकोर्ट ने ED की कार्रवाई को ठहराया वैध, याचिकाएं खारिज

Rajan Prajapati
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तेलंगाना हाईकोर्ट ने PMLA मामले में ईडी की कार्रवाई को वैध ठहराते हुए सभी याचिकाएं खारिज कीं और कुर्की आदेशों को बरकरार रखा। - संजय अग्रवाल और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य

PMLA केस में झटका: तेलंगाना हाईकोर्ट ने ED की कार्रवाई को ठहराया वैध, याचिकाएं खारिज

हैदराबाद स्थित तेलंगाना उच्च न्यायालय ने मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) से जुड़े एक अहम मामले में याचिकाकर्ताओं को कोई राहत नहीं दी। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को सही ठहराते हुए तीनों रिट याचिकाएं खारिज कर दीं।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला उन आदेशों को चुनौती देने से जुड़ा था, जो प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई जांच के बाद पारित किए गए थे। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि ईडी द्वारा जारी अस्थायी कुर्की (Provisional Attachment) और उसके बाद की कार्यवाही कानून के प्रावधानों के खिलाफ है।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अधिनिर्णायक प्राधिकरण (Adjudicating Authority) का गठन विधिसम्मत नहीं था और एकल सदस्य द्वारा पारित आदेश अवैध हैं।

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दो जजों की पीठ ने विस्तार से सुनवाई के दौरान PMLA के प्रावधानों की व्याख्या की। अदालत ने साफ किया कि कानून के तहत अधिनिर्णायक प्राधिकरण का गठन लचीला है और एकल सदस्यीय पीठ द्वारा आदेश पारित किया जाना अपने आप में अवैध नहीं है।

पीठ ने कहा,

“कानून की संरचना ऐसी है कि आवश्यक परिस्थितियों में एकल सदस्य भी अधिकार का प्रयोग कर सकता है, और यह व्यवस्था PMLA के उद्देश्य के अनुरूप है।”

अदालत ने यह भी माना कि प्रारंभिक चरण में ईडी को संदेह के आधार पर कार्रवाई करने का अधिकार है और इस स्तर पर पूर्ण आपराधिक प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती।

कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष को कमजोर पाया। पीठ ने कहा कि वे अपने पास मौजूद संपत्तियों के स्रोत को संतोषजनक ढंग से साबित करने में असफल रहे।

अदालत ने टिप्पणी की,

“याचिकाकर्ताओं द्वारा दी गई व्याख्या अस्पष्ट, विरोधाभासी और ठोस दस्तावेजों से रहित है। ऐसे में प्रतिकूल निष्कर्ष निकालना उचित है।”

इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि आर्थिक अपराधों में शामिल व्यक्तियों को तकनीकी आधार पर कानून से बचने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

अंत में, उच्च न्यायालय ने सभी तर्कों को खारिज करते हुए तीनों रिट याचिकाएं निरस्त कर दीं।

अदालत ने स्पष्ट किया कि अधिनिर्णायक प्राधिकरण द्वारा 19 अप्रैल 2022 और 25 मई 2022 को पारित आदेश पूरी तरह वैध हैं और उन्हें बरकरार रखा जाता है।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सभी लंबित आवेदन स्वतः समाप्त माने जाएंगे और मामले में कोई लागत (costs) नहीं लगाई जाएगी।

Case Details

Case Title: Sanjay Agarwal & Others vs Union of India & Others

Case Number: W.P. Nos. 45761, 31957 & 31958 of 2022

Judges: Justice P. Sam Koshy & Justice Suddala Chalapathi Rao

Decision Date: 26 March 2026

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