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अचानक हुए झगड़े के दौरान पति को चाकू मारना हत्या के अपवाद के अंतर्गत आता है: तेलंगाना हाईकोर्ट ने पत्नी की 4 साल की सजा को जुर्माने में बदला

Shivam Y.

तेलंगाना हाईकोर्ट ने पति की मौत के मामले में पत्नी की दोषसिद्धि बरकरार रखी, लेकिन अचानक हुए झगड़े को देखते हुए जेल की सजा हटाकर केवल जुर्माना रखा। - रेशमा बनाम आंध्र प्रदेश राज्य।

अचानक हुए झगड़े के दौरान पति को चाकू मारना हत्या के अपवाद के अंतर्गत आता है: तेलंगाना हाईकोर्ट ने पत्नी की 4 साल की सजा को जुर्माने में बदला
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तेलंगाना हाईकोर्ट ने पति की मौत से जुड़े एक आपराधिक मामले में महिला की दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए उसकी चार साल की जेल सजा को हटाकर केवल जुर्माने में बदल दिया। अदालत ने माना कि घटना पूर्व नियोजित हत्या नहीं थी, बल्कि अचानक हुए झगड़े और गुस्से की स्थिति में हुई थी।

मामले की पृष्ठभूमि

अभियोजन के अनुसार, आरोपी महिला ने अपने पति पर चाकू से हमला किया था, जिससे उसकी मौत हो गई। ट्रायल कोर्ट ने महिला को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 भाग-II के तहत दोषी ठहराते हुए चार साल के कठोर कारावास और 500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।

अपील में बचाव पक्ष ने दलील दी कि घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था और पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। यह भी कहा गया कि मृतक घटना के समय आरोपी के मायके पहुंचा था और वहां परिवार के लोगों के साथ अभद्र व्यवहार कर रहा था।

राज्य पक्ष ने अदालत से कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य आरोपी की संलिप्तता साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।

न्यायमूर्ति तिरुमाला देवी ईडा ने गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और बरामद हथियार सहित पूरे रिकॉर्ड की जांच की। अदालत ने पाया कि पड़ोसी गवाह ने घर से झगड़े की आवाज सुनी थी और बाद में मृतक को गर्दन पर चोट के साथ पड़ा देखा था।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी यह स्पष्ट हुआ कि मौत चाकू के वार से हुई गंभीर अंदरूनी चोटों के कारण हुई थी। जांच के दौरान कथित हथियार भी बरामद किया गया था।

अदालत ने कहा कि पति-पत्नी के संबंधों में तनाव था और घटना अचानक हुए पारिवारिक विवाद के दौरान हुई। रिकॉर्ड के अनुसार, मृतक कथित तौर पर गुस्से में आरोपी और उसके परिवार के साथ झगड़ा कर रहा था।

अदालत ने कहा,

“परिवार के बीच हुए झगड़े और परिस्थितियों से यह स्पष्ट होता है कि आरोपी ने गुस्से और आवेश में यह कदम उठाया।”

कोर्ट ने माना कि मामला आईपीसी की धारा 300 के अपवाद 4 के दायरे में आता है, जहां बिना पूर्व योजना के अचानक हुए झगड़े में हुई मौत को हत्या नहीं माना जाता।

हाईकोर्ट ने आरोपी महिला की धारा 304 भाग-II आईपीसी के तहत दोषसिद्धि को बरकरार रखा। हालांकि, अदालत ने सजा के प्रश्न पर नरमी बरती।

कोर्ट ने चार साल की कठोर कारावास की सजा को रद्द करते हुए उसे केवल 500 रुपये के जुर्माने तक सीमित कर दिया। अदालत ने रिकॉर्ड में यह भी नोट किया कि जुर्माना पहले ही जमा किया जा चुका है।

Case Details

Case Title: Reshma v. State of A.P.

Case Number: Criminal Appeal No.1154 of 2011

Judge: Justice Tirumala Devi Eada

Decision Date: 01 April 2026

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