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सबरीमाला घी प्रसादम मामले में केरल हाईकोर्ट सख्त, ₹17.14 लाख नुकसान की जांच पर उठाए सवाल; नए सिरे से समीक्षा का आदेश

Shivam Y.

केरल हाईकोर्ट ने सबरीमाला घी प्रसादम बिक्री में ₹17.14 लाख के कथित नुकसान से जुड़े मामले में विजिलेंस रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए नए सिरे से स्वतंत्र समीक्षा का आदेश दिया है। - संयुक्त निदेशक बनाम सचिव और स्वतः संज्ञान (Suo Motu) बनाम केरल राज्य व अन्य

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सबरीमाला घी प्रसादम मामले में केरल हाईकोर्ट सख्त, ₹17.14 लाख नुकसान की जांच पर उठाए सवाल; नए सिरे से समीक्षा का आदेश
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केरल हाईकोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में अभिषेक घी प्रसादम (आदिया शिष्टम नेय्य) की बिक्री में कथित अनियमितताओं और वित्तीय नुकसान से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। अदालत ने विजिलेंस जांच रिपोर्ट पर असंतोष जताते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र और नए सिरे से समीक्षा कराने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी और न्यायमूर्ति के.वी. जयकुमार की खंडपीठ ने कहा कि उपलब्ध सामग्री को देखते हुए मामले को केवल प्रशासनिक लापरवाही मानकर बंद नहीं किया जा सकता।

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मामले की पृष्ठभूमि

मामला तब सामने आया जब केरल राज्य ऑडिट विभाग की त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड ऑडिट शाखा ने सबरीमाला में मंडलम और मकरविलक्कु उत्सव के दौरान अभिषेक घी प्रसादम के संग्रहण, प्रसंस्करण और लेखांकन की जांच की।

ऑडिट रिपोर्ट में घी के संग्रह, छानने और वितरण की प्रक्रिया में गंभीर खामियों की ओर संकेत किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न चरणों में घी की मात्रा का उचित मापन नहीं किया जा रहा था, जिससे पूरे लेखा-जोखा तंत्र की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए।

इसी दौरान सबरीमाला के विशेष आयुक्त ने भी एक रिपोर्ट प्रस्तुत कर सन्निधानम स्थित घी बिक्री काउंटरों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों के आरोप लगाए।

हाईकोर्ट के पूर्व निर्देशों के बाद विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो ने मामले की जांच की।

जांच रिपोर्ट में कहा गया कि 17 नवंबर 2025 से 27 दिसंबर 2025 के बीच सन्निधानम के चार घी बिक्री काउंटरों पर हुई कथित अनियमितताओं के कारण त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड को ₹17.14 लाख का नुकसान हुआ।

हालांकि विजिलेंस ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड के उचित रखरखाव के अभाव में यह तय करना संभव नहीं हो पाया कि किस कर्मचारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी थी। इसी आधार पर अधिकांश आरोपित कर्मचारियों के खिलाफ आगे की आपराधिक कार्रवाई बंद करने की सिफारिश की गई।

खंडपीठ ने जांच एजेंसी के निष्कर्षों पर गंभीर सवाल उठाए।

अदालत ने कहा, “आरोप केवल प्रशासनिक त्रुटियों या प्रक्रियागत कमियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें सार्वजनिक संपत्ति के प्रबंधन से जुड़े लोक सेवकों द्वारा कथित आपराधिक कदाचार, विश्वासभंग, धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर पहलू भी शामिल हैं।”

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अदालत ने यह भी नोट किया कि जांच में स्वयं यह पाया गया है कि संबंधित कर्मचारियों को घी सौंपा गया था, उनके ऊपर उसका हिसाब देने की जिम्मेदारी थी और उस जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं हुआ, जिससे संस्थान को आर्थिक नुकसान पहुंचा।

पीठ ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में मामले को केवल रिकॉर्ड रखने की खामी बताकर नहीं छोड़ा जा सकता।

हाईकोर्ट ने माना कि मामले में एक वरिष्ठ, अनुभवी और निष्पक्ष अधिकारी द्वारा स्वतंत्र पुनर्मूल्यांकन आवश्यक है।

अदालत ने निर्देश दिया कि जांच से संबंधित सभी रिकॉर्ड और दस्तावेज एक वरिष्ठ अधिकारी को सौंपे जाएं। वह अधिकारी उपलब्ध साक्ष्यों और विजिलेंस रिपोर्ट के निष्कर्षों की दोबारा समीक्षा करेगा तथा यह तय करेगा कि क्या आरोपित व्यक्तियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय न्याय संहिता के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत अपराध बनते हैं।

अदालत ने संबंधित अधिकारी को चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 को होगी।

Case Details

Case Title: The Joint Director v. The Secretary & Suo Motu v. State of Kerala & Others

Case Number: DBAR No. 1 of 2026 & SSCR No. 3 of 2026

Judges: Justice Raja Vijayaraghavan V and Justice K.V. Jayakumar

Decision Date: June 9, 2026

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