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किरायेदारों के बीच निजी पार्किंग विवाद को रिट याचिका के माध्यम से हल नहीं किया जा सकता है: केरल उच्च न्यायालय

Shivam
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केरल हाईकोर्ट ने दुकान के बाहर वाहन पार्किंग विवाद से जुड़ी रिट अपील खारिज करते हुए कहा कि मामला निजी अधिकारों का है, सार्वजनिक कानून का नहीं। - राजेश बाबू बनाम केरल राज्य और अन्य।

किरायेदारों के बीच निजी पार्किंग विवाद को रिट याचिका के माध्यम से हल नहीं किया जा सकता है: केरल उच्च न्यायालय

केरल हाईकोर्ट ने एक इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम मालिक की अपील खारिज करते हुए कहा है कि दुकान के सामने वाहन पार्किंग को लेकर उठा विवाद निजी अधिकारों से जुड़ा मामला है और इसे संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका में नहीं सुलझाया जा सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

अपीलकर्ता राजेश बाबू कोट्टारक्करा नगरपालिका क्षेत्र में एक इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम और सर्विस सेंटर चलाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि उसी भवन में किराए पर काम कर रहे एक आर्किटेक्ट और स्ट्रक्चरल इंजीनियर अपनी गाड़ियां इस तरह पार्क करते हैं जिससे उनकी दुकान का सामने का हिस्सा ढक जाता है और ग्राहकों के आने-जाने में दिक्कत होती है।

याचिका में उन्होंने अदालत से मांग की थी कि इस पार्किंग को अवैध घोषित किया जाए और दुकान के संचालन में बाधा रोकने के लिए पुलिस सुरक्षा दी जाए।

सिंगल जज ने पहले ही यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि दोनों पक्ष एक ही मकान मालिक के किराएदार हैं और पार्किंग स्थान के उपयोग पर दोनों का समान अधिकार है। अदालत ने कहा था कि यदि किसी निजी अधिकार का उल्लंघन हुआ है तो उसके लिए सिविल कोर्ट का रास्ता अपनाया जा सकता है।

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डिवीजन बेंच में सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति ए.के. जयशंकरन नांबियार और न्यायमूर्ति प्रीता ए.के. ने सिंगल जज के फैसले से सहमति जताई।

अदालत ने कहा कि जिस जगह पर पार्किंग को लेकर विवाद है वह निजी भवन का हिस्सा है, इसलिए उसे सार्वजनिक स्थान नहीं माना जा सकता।

बेंच ने कहा,

“भवन के परिसर को किसी भी स्थिति में सार्वजनिक स्थान नहीं माना जा सकता।”

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मोटर वाहन अधिनियम या सार्वजनिक स्थानों के नियमन से जुड़े प्रावधान इस मामले पर लागू नहीं होते क्योंकि विवाद निजी संपत्ति के भीतर का है।

अदालत ने यह भी नोट किया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई आरोप नहीं है जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा होने की बात सामने आए और पुलिस सुरक्षा की आवश्यकता साबित हो।

हाईकोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 226 के तहत रिट क्षेत्राधिकार मुख्य रूप से सार्वजनिक कानून से जुड़े मामलों के लिए है और निजी विवादों के समाधान के लिए सामान्यतः इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

इसी आधार पर अदालत ने अपील खारिज कर दी।

Case Details:

Case Title: Rajesh Babu v. State of Kerala & Ors.

Case Number: W.A. No. 1048 of 2026

Judges: Justice A.K. Jayasankaran Nambiar and Justice Preeta A.K.

Decision Date: May 19, 2026

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