केरल हाईकोर्ट ने एक छह वर्षीय बच्चे की भलाई को प्राथमिकता देते हुए उसकी अंतरिम अभिरक्षा फिलहाल मां को देने का आदेश दिया है। अदालत ने यह फैसला उस घटना के बाद लिया, जिसमें एक अज्ञात वकील ने कोर्टरूम के भीतर बच्चे से बात की और कथित रूप से उसे बताया कि उसका पिता नीचे उसका इंतजार कर रहा है। इस घटना के बाद बच्चा स्पष्ट रूप से भयभीत और मानसिक रूप से परेशान दिखाई दिया।
यह आदेश न्यायमूर्ति जे. निशा बानू और न्यायमूर्ति शोभा अन्नामा ईपेन की खंडपीठ द्वारा 5 जून, 2026 को पारित किया गया था।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद बच्चे की अभिरक्षा को लेकर पति-पत्नी के बीच चल रहे पारिवारिक मुकदमे से जुड़ा है, जो फैमिली कोर्ट, कोझिकोड में लंबित है। मां ने फैमिली कोर्ट के अंतरिम अभिरक्षा आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था।
इससे पहले हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों और बच्चे से बातचीत की थी। अदालत के निर्देश पर गर्मी की छुट्टियों के दौरान बच्चे की अभिरक्षा मां को सौंपी गई थी।
5 जून 2026 को सुनवाई के दौरान न्यायालय बच्चे से अकेले बातचीत करना चाहता था ताकि उसकी भावनाओं और मानसिक स्थिति को समझा जा सके। लेकिन बातचीत शुरू होने से पहले एक अप्रत्याशित घटना सामने आई।
मां की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि एक अज्ञात वकील कोर्टरूम में आया और बच्चे से कहा कि उसका पिता नीचे इंतजार कर रहा है। इसके बाद वह तुरंत वहां से चला गया।
अदालत ने पाया कि घटना से पहले बच्चा सामान्य और प्रसन्न दिखाई दे रहा था, लेकिन बाद में वह घबराया हुआ और असहज हो गया। वह अपनी मां का हाथ कसकर पकड़े रहा और उनसे अलग होने को तैयार नहीं था।
न्यायालय ने कहा कि बच्चे तक यह संदेश पहुंचाना गंभीर चिंता का विषय है, खासकर तब जब पिता को उस दिन व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट दी गई थी।
खंडपीठ ने कहा, “बच्चे को यह संदेश कि उसका पिता मौजूद है और इंतजार कर रहा है, किसी विशेष उद्देश्य से दिया गया प्रतीत होता है।”
अदालत ने यह भी कहा कि वकीलों की जिम्मेदारी केवल अपने मुवक्किलों तक सीमित नहीं होती, बल्कि न्याय व्यवस्था और समाज के प्रति भी उनकी जवाबदेही होती है।
हाईकोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रिकॉर्डिंग और सीसीटीवी फुटेज की जांच की। अदालत ने कहा कि फुटेज में एक अज्ञात वकील बच्चे के पास जाकर उससे बात करते हुए और फिर जल्दबाजी में वहां से निकलते हुए दिखाई देता है।
कोर्ट ने रजिस्ट्री को संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और उस वकील की पहचान करने के निर्देश दिए। इसके लिए बार काउंसिल ऑफ केरल और अन्य संगठनों की सहायता लेने की भी अनुमति दी गई।
बच्चे की मानसिक स्थिति, भावनात्मक तनाव और उसके सर्वोत्तम हितों को ध्यान में रखते हुए केरल हाईकोर्ट ने फिलहाल बच्चे की अंतरिम अभिरक्षा मां को देने का आदेश दिया।
साथ ही, दोनों पक्षों की सहमति पर मामले को हाईकोर्ट के मध्यस्थता केंद्र भेज दिया गया। अदालत ने दोनों पक्षों को 15 जून 2026 को मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल होने का निर्देश दिया।
Case Details
Case Title: Sreedhanya Bhaskaran v. Balakrishnan V.S. & Another
Case Number: OP (FC) No. 170 of 2026
Judges: Justice J. Nisha Banu and Justice Shoba Annamma Eapen
Decision Date: June 5, 2026





