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बच्ची की मौत के मामले में आरोपी मां को राहत: केवल सह-आरोपी के कबूलनामे के आधार पर हिरासत जारी नहीं रखी जा सकती – केरल हाईकोर्ट

Shivam Y.

केरल हाई कोर्ट ने अपनी नाबालिग बेटी की मौत के मामले में आरोपी एक महिला को ज़मानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि सह-आरोपी के कबूलनामे के अलावा, कोई भी सीधा सबूत उसे इस कथित अपराध से नहीं जोड़ता है। - श्रीथु बनाम केरल राज्य

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बच्ची की मौत के मामले में आरोपी मां को राहत: केवल सह-आरोपी के कबूलनामे के आधार पर हिरासत जारी नहीं रखी जा सकती – केरल हाईकोर्ट
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केरल हाईकोर्ट ने एक नाबालिग बच्ची की मौत से जुड़े मामले में आरोपी मां को जमानत प्रदान कर दी है। अदालत ने कहा कि सह-आरोपी के कबूलनामे के अलावा महिला को अपराध से जोड़ने वाला कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति डॉ. कौसर एडप्पागथ ने 8 जून 2026 को पारित किया।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला तिरुवनंतपुरम जिले के बालारामपुरम पुलिस स्टेशन में दर्ज अपराध संख्या 154/2025 से संबंधित है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, महिला का भाई, जो इस मामले में प्रथम आरोपी है, 30 जनवरी 2025 की सुबह कथित रूप से उसकी नाबालिग बेटी को कमरे से उठाकर ले गया और बाद में उसे एक कुएं में फेंक दिया, जिससे उसकी मृत्यु हो गई।

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अभियोजन का आरोप था कि महिला ने इस घटना में अपने भाई का सहयोग किया तथा अपराध को अंजाम देने में सहायता पहुंचाई। यह भी आरोप लगाया गया कि घटना के बाद ध्यान भटकाने के लिए लगाए गए आगजनी के प्रयास में इस्तेमाल पेट्रोल महिला ने उपलब्ध कराया था।

महिला की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उसे झूठा फंसाया गया है और उसके खिलाफ कोई ठोस सामग्री उपलब्ध नहीं है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि महिला ने कथित अपराध में कोई भूमिका निभाई।

वहीं, राज्य की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि आरोपी महिला अपराध की योजना और क्रियान्वयन का हिस्सा थी, इसलिए उसे इस चरण में राहत नहीं दी जानी चाहिए।

मामले की केस डायरी का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि शुरुआत में दर्ज एफआईआर में महिला को आरोपी नहीं बनाया गया था। अदालत ने कहा कि उसे लगभग नौ महीने बाद केवल प्रथम आरोपी के कथित कबूलनामे के आधार पर मामले में शामिल किया गया।

न्यायालय ने यह भी नोट किया कि अभियोजन द्वारा बताए गए प्रत्यक्ष कृत्य पूरी तरह प्रथम आरोपी के खिलाफ आरोपित हैं। अदालत ने कहा कि महिला पर अपराध में सहयोग और मिलीभगत का आरोप तो लगाया गया है, लेकिन कबूलनामे के अतिरिक्त कोई स्वतंत्र या प्रत्यक्ष सामग्री उसके खिलाफ उपलब्ध नहीं है।

अदालत ने कहा, “अभियोजन का मामला यह है कि आवेदिका ने प्रथम आरोपी के साथ मिलकर अपराध को सुगम बनाया। हालांकि, कबूलनामे के अलावा उसे अपराध से जोड़ने वाली कोई प्रत्यक्ष सामग्री उपलब्ध नहीं है।”

न्यायालय ने यह भी ध्यान में रखा कि महिला एक महिला आरोपी है और सितंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में है। अदालत ने माना कि घटना अत्यंत गंभीर और संवेदनशील है, लेकिन उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए उसकी आगे की हिरासत आवश्यक नहीं प्रतीत होती।

इन परिस्थितियों को देखते हुए केरल हाईकोर्ट ने जमानत याचिका स्वीकार कर ली। अदालत ने महिला को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और दो जमानतदारों पर रिहा करने का निर्देश दिया। साथ ही जांच में सहयोग करने, प्रत्येक शनिवार जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने, गवाहों को प्रभावित न करने और बिना अनुमति राज्य से बाहर न जाने जैसी शर्तें भी लगाईं।

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Case Details

Case Title: Sreethu v. State of Kerala

Case Number: Bail Application No. 2683 of 2026

Judge: Justice Dr. Kauser Edappagath

Decision Date: June 8, 2026

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