Logo
Court Book - India Code App - Play Store

advertisement

बेंगलुरु के 67 वर्षीय वृद्ध के खिलाफ एनडीपीएस मामला कर्नाटक हाईकोर्ट ने किया खारिज

Prince V.

कर्नाटक हाईकोर्ट ने 67 वर्षीय व्यक्ति के खिलाफ दर्ज एनडीपीएस मामला खारिज किया, कोर्ट ने कहा कि गांजा उगाने का कोई ठोस सबूत नहीं है और जब्त पौधों को ठीक से अलग नहीं किया गया।

बेंगलुरु के 67 वर्षीय वृद्ध के खिलाफ एनडीपीएस मामला कर्नाटक हाईकोर्ट ने किया खारिज

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक 67 वर्षीय बुजुर्ग के खिलाफ दर्ज एनडीपीएस एक्ट के तहत आपराधिक मामला खारिज कर दिया है। इस व्यक्ति के बेंगलुरु स्थित घर के पिछवाड़े से कथित रूप से पांच से छह गांजा के पौधे पाए गए थे। कोर्ट ने पाया कि गांजा उगाने के कोई पुख्ता साक्ष्य नहीं थे और पौधों की जब्ती व तौलने की प्रक्रिया कानून के विरुद्ध थी।

यह मामला चंद्रशेखर बनाम कर्नाटक राज्य शीर्षक से CRIMINAL PETITION No.11138 OF 2024 के रूप में दर्ज था। न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने चंद्रशेखर की याचिका स्वीकार की और उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को रद्द कर दिया।

Read Also:-कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा: आपराधिक कृत्यों पर नहीं लागू होती विधायी विशेषाधिकार, सीटी रवि के खिलाफ केस रद्द करने से इनकार

पुलिस ने 1 सितंबर 2023 को एक सूचना के आधार पर चंद्रशेखर के जयनगर स्थित आवास की तलाशी ली और पांच गांजा पौधे जब्त किए। इसके बाद एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(a) और 20(b)(ii)(c) के तहत मामला दर्ज किया गया और चार्जशीट दाखिल की गई।

याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि पुलिस ने जिन पौधों को जब्त किया, वे सामान्य जंगली पौधों के साथ मिले-जुले थे और उनमें से गांजा की पहचान नहीं की गई थी। तौल के समय जड़ों, डंठल, पत्तियों और फूलों समेत पूरे पौधों को 27.360 किलोग्राम के रूप में तौला गया, जो कि कानून के अनुसार गलत है।

अभियोजन ने यह साबित करने के लिए एक भी ठोस सबूत पेश नहीं किया कि याचिकाकर्ता वास्तव में गांजा उगा रहा था, कोर्ट ने कहा। अदालत ने पाया कि प्लास्टिक बैग समेत पूरे पौधों को बिना छांटे तौला गया, जो प्रक्रिया में गंभीर त्रुटि है।

Read Also:-कर्नाटक हाईकोर्ट ने ग्रैच्युटी बीमा प्रीमियम विवाद में होटल एसोसिएशन के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाई। कोर्ट ने कहा कि जिन कर्मचारियों ने 5 साल की सेवा पूरी की है, सिर्फ उनके लिए प्रीमियम देने पर दंडात्मक कदम नहीं उठाए जाएंगे

अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि चार्जशीट दायर हो चुकी है और मुकदमे के दौरान सच्चाई सामने आएगी, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले अलख राम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2004) 1 SCC 766 का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि प्राकृतिक रूप से उगने वाले पौधों को "उत्पादन" नहीं माना जा सकता।

"यदि इस मामले के तथ्यों को अलख राम केस के फैसले के आलोक में परखा जाए, तो याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप टिक नहीं सकते," अदालत ने कहा।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब्त किए गए पौधों में गांजा और सामान्य पत्तियों को अलग नहीं किया गया, और यह कानून के विपरीत है।

यह एक स्वीकार्य तथ्य है कि गांजा की पत्तियों और बाकी पौधों को अलग किए बिना तौल कर चार्जशीट दाखिल की गई है। इसलिए चार्जशीट पूरी तरह कानून के खिलाफ है, न्यायालय ने कहा।

Read Also:-कर्नाटक हाईकोर्ट ने पुलिस मुठभेड़ में मारे गए प्रवासी मजदूर रितेश कुमार के शव को सुपुर्द करने और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार पोस्टमार्टम कराने की अनुमति दी। कोर्ट ने कहा शव को दफनाया जाए, दाह संस्कार नहीं होगा।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जयशम जयशिम्हा राव ने पक्ष रखा, जबकि राज्य की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील बी.एन. जगदीश ने बहस की।

प्रस्तुति: याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जयशाम जयशिम्हा राव उपस्थित।
प्रत्युत्तरकर्ता की ओर से: अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता बी. एन. जगदीश उपस्थित।

मामला शीर्षक: चंद्रशेखर बनाम कर्नाटक राज्य
मामला संख्या: आपराधिक याचिका संख्या 11138 वर्ष 2024

Advertisment

Recommended Posts