सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के कर्मियों से जुड़े सेवा विवादों में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि केंद्र सरकार और संबंधित बल के महानिदेशक का कार्यालय दिल्ली में स्थित है, तो दिल्ली हाईकोर्ट को याचिका सुनने का अधिकार क्षेत्र प्राप्त होगा। अदालत ने BSF के एक बर्खास्त जवान की याचिका को पुनर्जीवित करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सुनवाई से इनकार किया गया था।
अपीलकर्ता बख्शीश अहमद BSF की 44वीं बटालियन में तैनात थे। उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू हुई, जिसमें आरोप था कि उन्होंने पहली शादी के रहते हुए और आवश्यक अनुमति प्राप्त किए बिना दूसरी शादी कर ली थी।
स्टाफ कोर्ट ऑफ इंक्वायरी में यह पाया गया कि अपीलकर्ता ने कथित तौर पर दूसरी शादी की थी, जिसके बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। निर्धारित समय में जवाब न मिलने पर अक्टूबर 2022 में उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। बाद में उनकी वैधानिक याचिका भी BSF के महानिरीक्षक द्वारा खारिज कर दी गई।
इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन हाईकोर्ट ने यह कहते हुए याचिका सुनने से इनकार कर दिया कि विवाद से जुड़े घटनाक्रम पश्चिम बंगाल और जम्मू-कश्मीर में हुए थे।
अपीलकर्ता की ओर से कहा गया कि BSF के महानिदेशक और गृह मंत्रालय दोनों के कार्यालय दिल्ली में स्थित हैं। इसलिए संविधान के अनुच्छेद 226(1) के तहत दिल्ली हाईकोर्ट को याचिका सुनने का अधिकार प्राप्त है।
केंद्र सरकार ने इसका विरोध करते हुए तर्क दिया कि विवाद से संबंधित कारण-कार्रवाई (Cause of Action) दिल्ली में उत्पन्न नहीं हुई, इसलिए अन्य हाईकोर्ट अधिक उपयुक्त मंच हैं।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के पास इस मामले की सुनवाई का अधिकार क्षेत्र मौजूद था क्योंकि केंद्र सरकार और BSF के महानिदेशक इस विवाद में आवश्यक पक्षकार हैं।
पीठ ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने “फोरम नॉन कन्वीनियंस” (Forum Non Conveniens) के सिद्धांत को अनुचित तरीके से लागू किया।
अदालत ने टिप्पणी की, “जब संवैधानिक उपचार की बात हो और याचिका अनुच्छेद 226(1) के तहत दायर की गई हो, तब फोरम नॉन कन्वीनियंस का सिद्धांत बहुत सीमित परिस्थितियों में ही लागू किया जाना चाहिए।”
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि CAPF के कर्मी, जिनमें BSF के सदस्य भी शामिल हैं, दिल्ली हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं क्योंकि संबंधित केंद्रीय प्राधिकरणों के कार्यालय दिल्ली में स्थित हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए अपील स्वीकार कर ली। अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता की मूल रिट याचिका को पुनः बहाल किया जाए और उसका निपटारा कानून के अनुसार गुण-दोष के आधार पर किया जाए।
अदालत ने प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए दो महीने का समय दिया, जबकि याचिकाकर्ता को उसके बाद प्रत्युत्तर दाखिल करने की अनुमति दी गई।
Case Title: Baksish Ahmad v. Union of India & Anr.
Case Number: Civil Appeal Nos. arising out of SLP (Civil) Nos. 855-856 of 2026
Judge: Justice Dipankar Datta and Justice Satish Chandra Sharma
Decision Date: June 9, 2026















