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कानूनी सेवाओं में कमी के लिए वकील के खिलाफ उपभोक्ता शिकायत उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत स्वीकार्य नहीं है: आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट

Shivam Y.

आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने कंज्यूमर फोरम के आदेशों को चुनौती देने वाली एक रिट याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वकीलों के खिलाफ कानूनी सेवाओं में कमी का आरोप लगाने वाली शिकायतें 'कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट' के तहत स्वीकार्य नहीं हैं। - A.S.S.K. दुर्गा प्रसाद बनाम नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन और 3 अन्य।

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कानूनी सेवाओं में कमी के लिए वकील के खिलाफ उपभोक्ता शिकायत उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत स्वीकार्य नहीं है: आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट
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आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी अधिवक्ता द्वारा दी गई कानूनी सेवाओं को लेकर कथित सेवा में कमी (Deficiency in Service) का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत शिकायत दायर नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही कानून स्पष्ट कर चुका है और ऐसे मामलों में उपभोक्ता आयोगों के पास अधिकार क्षेत्र नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता ने विशाखापत्तनम स्थित जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में एक अधिवक्ता के खिलाफ कानूनी सेवाओं में कथित कमी का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता शिकायत दायर की थी। जिला आयोग ने मार्च 2022 में शिकायत खारिज कर दी।

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इसके बाद राज्य उपभोक्ता आयोग में दायर अपील भी खारिज हो गई। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (NCDRC) ने भी पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इन तीनों आदेशों को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हाईकोर्ट की टिप्पणी

न्यायमूर्ति रवि नाथ तिलहरी और न्यायमूर्ति सुभेंदु सामंत की खंडपीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पूरी तरह स्पष्ट है।

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अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता यह नहीं बता सका कि अधिवक्ता के विरुद्ध कानूनी सेवाओं में कथित कमी के आधार पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत शिकायत किस प्रकार सुनवाई योग्य हो सकती है।

पीठ ने कहा,

"कानून पूरी तरह स्थापित है कि अधिवक्ता द्वारा कानूनी क्षेत्र में प्रदान की गई सेवाएं उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के दायरे में नहीं आती हैं।"

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के बार ऑफ़ इंडियन लॉयर्स बनाम डी.के. गांधी पीएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ कम्युनिकेबल डिज़ीज़ेज़ फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अधिवक्ता और मुवक्किल के बीच का संबंध "व्यक्तिगत सेवा के अनुबंध" (Contract of Personal Service) की श्रेणी में आता है, जिसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में "सेवा" की परिभाषा से बाहर रखा गया है। इसलिए अधिवक्ताओं के खिलाफ कानूनी सेवाओं में कथित कमी को लेकर उपभोक्ता शिकायतें बनाए रखने योग्य नहीं हैं।

अदालत का फैसला

सुप्रीम कोर्ट के बाध्यकारी निर्णय का पालन करते हुए हाईकोर्ट ने माना कि अधिवक्ता के खिलाफ दायर उपभोक्ता शिकायत कानूनन सुनवाई योग्य नहीं थी। इसलिए जिला उपभोक्ता आयोग, राज्य आयोग और राष्ट्रीय आयोग द्वारा पारित आदेशों में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने रिट याचिका खारिज कर दी। अदालत ने लागत (Costs) को लेकर कोई आदेश पारित नहीं किया तथा लंबित सभी अन्य याचिकाओं को भी समाप्त माना।

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Case Details

Case Title: A.S.S.K. Durga Prasad v. National Consumer Disputes Redressal Commission & 3 Other

Case Number: Writ Petition No. 29425 of 2025

Judge: Justice Ravi Nath Tilhari and Justice Subhendu Samanta

Decision Date: 24 June 2026

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