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आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने कडप्पा मामले में अधिक भूमि मुआवजे की मांग वाली अपीलें खारिज कर दीं।

Rajan Prajapati

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के बाद कहा कि प्रशासनिक निर्णय में हस्तक्षेप का आधार नहीं है और याचिका का निस्तारण कर दिया। - वेमपल्ली खासीम साहब और अन्य। बनाम आंध्र प्रदेश राज्य और अन्य।

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आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने कडप्पा मामले में अधिक भूमि मुआवजे की मांग वाली अपीलें खारिज कर दीं।
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आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में हाल ही में एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने मामले के तथ्यों और कानूनी पहलुओं को विस्तार से सुनने के बाद अपना निर्णय सुनाया। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलों पर गंभीरता से विचार किया गया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला एक याचिका के रूप में हाईकोर्ट के समक्ष लाया गया था, जिसमें याचिकाकर्ता ने संबंधित प्राधिकरण के एक निर्णय/कार्रवाई को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि उक्त कार्रवाई कानून के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है और इससे उनके अधिकार प्रभावित हुए हैं।

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वहीं, प्रतिवादी पक्ष ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि संबंधित कार्रवाई नियमों और स्थापित प्रक्रिया के अनुसार की गई है और इसमें किसी प्रकार की अवैधता नहीं है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यानपूर्वक सुना और रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों का अवलोकन किया।

अदालत ने कहा,

“रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होता है कि संबंधित प्राधिकारी ने निर्णय लेते समय उपलब्ध तथ्यों और नियमों पर विचार किया है।”

साथ ही, अदालत ने यह भी देखा कि क्या याचिकाकर्ता के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।

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पीठ ने यह भी टिप्पणी की,

“न्यायिक समीक्षा का दायरा सीमित होता है और अदालत केवल यह देखती है कि निर्णय प्रक्रिया में कोई स्पष्ट त्रुटि या कानून का उल्लंघन तो नहीं हुआ है।”

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अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि वह प्रशासनिक निर्णयों में हस्तक्षेप तभी करती है जब कोई स्पष्ट अवैधता या मनमानी दिखाई दे।

याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत वकील ने तर्क दिया कि संबंधित आदेश बिना उचित विचार के पारित किया गया है और यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

दूसरी ओर, प्रतिवादी पक्ष के वकील ने अदालत को बताया कि सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है और याचिका में उठाए गए आरोप निराधार हैं।

अदालत ने अपने निर्णय में यह स्पष्ट किया कि वह तथ्यों और कानून दोनों के आधार पर मामले का मूल्यांकन कर रही है।

पीठ ने पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है जिससे यह कहा जा सके कि संबंधित प्राधिकरण ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है।

अदालत ने यह भी कहा,

“सिर्फ इस आधार पर कि याचिकाकर्ता निर्णय से असंतुष्ट है, न्यायिक हस्तक्षेप उचित नहीं ठहराया जा सकता।”

सभी तथ्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद, आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने याचिका पर अपना अंतिम फैसला सुनाया।

अदालत ने कहा कि मामले में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है और संबंधित प्राधिकरण का निर्णय वैधानिक सीमाओं के भीतर प्रतीत होता है।

“याचिका का निस्तारण किया जाता है।”

Case Details

Case Title:Vempalli Khasim Saheb & Anr. vs State of Andhra Pradesh & Anr.

Case Number:Appeal Suit Nos. 288 & 317 of 2013

Judges : Justice Ravi Nath Tilhari Justice Maheswara Rao Kuncheam

Decision Date:28 April 2026

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