आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले 27 वर्षीय युवक के परिवार को राहत देते हुए मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) द्वारा दिए गए मुआवजे को बढ़ाकर ₹10.06 लाख कर दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि "उचित मुआवजा" देना न्यायालय का दायित्व है, भले ही पीड़ित पक्ष ने मुआवजा बढ़ाने के लिए अलग से अपील न की हो।
मामले की पृष्ठभूमि
यह अपील आंध्र प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (APSRTC) ने MACT के उस आदेश के खिलाफ दायर की थी, जिसमें वर्ष 2012 में मृतक वड्डे राजगोपाल के परिजनों को ₹7.28 लाख का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।
रिकॉर्ड के अनुसार, 30 मार्च 2008 को राजगोपाल अपनी मोटरसाइकिल से कर्नूल जिले के के. नागालापुरम गांव के पास जा रहे थे। इसी दौरान एक APSRTC बस से हुई दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई। मृतक उस समय एक निजी वित्तीय संस्था में क्रेडिट ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे।
APSRTC ने हाई कोर्ट में दलील दी कि दुर्घटना के लिए मृतक स्वयं भी जिम्मेदार था, उसकी आय का सही आकलन नहीं किया गया और उसके पिता तथा बहनों को आश्रित नहीं माना जा सकता।
अदालत की टिप्पणी
न्यायमूर्ति ए. हरि हरनाधा शर्मा ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई आधार नहीं है जिससे यह माना जाए कि दुर्घटना में मृतक की भी लापरवाही थी। अदालत ने यह भी नोट किया कि APSRTC अपनी ओर से कोई गवाह पेश नहीं कर सका, जबकि दावा पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शी, एफआईआर, चार्जशीट और अन्य दस्तावेजों के आधार पर अपना मामला साबित किया।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा,
"दावा करने वालों को केवल संभावनाओं के आधार पर अपना मामला स्थापित करना होता है, उनसे आपराधिक मामलों जैसी कठोर प्रमाणिकता की अपेक्षा नहीं की जा सकती।"
मुआवजे की राशि तय करते समय हाई कोर्ट ने माना कि MACT ने मृतक की आय का कम आकलन किया था। अदालत ने भविष्य की आय में संभावित वृद्धि को भी जोड़ा और अंतिम संस्कार खर्च, संपत्ति की हानि तथा पिता के लिए फिलियल कंसोर्टियम के मद में भी अतिरिक्त राशि प्रदान की।
अदालत ने यह भी दोहराया कि यदि न्यायसंगत मुआवजा अधिक बनता है तो अपीलीय अदालत, दावेदारों की अपील न होने पर भी, मुआवजा बढ़ा सकती है।
फैसला
हाई कोर्ट ने APSRTC की अपील खारिज कर दी, लेकिन MACT के मुआवजे में संशोधन करते हुए इसे ₹7.28 लाख से बढ़ाकर ₹10.06 लाख कर दिया। साथ ही, पूरी राशि पर दावा याचिका दाखिल होने की तारीख से भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का निर्देश दिया।
अदालत ने APSRTC को दो महीने के भीतर बढ़ी हुई राशि जमा करने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि बढ़ा हुआ मुआवजा सभी दावेदारों में समान रूप से बांटा जाएगा और बढ़ी हुई राशि पर देय न्यायालय शुल्क का भुगतान दावेदारों को करना होगा।
Case Details:
Case Title: The A.P.S.R.T.C. v. Vadde Durganna & Others
Case Number: M.A.C.M.A. No. 1424 of 2014
Judge: Justice A. Hari Haranadha Sarma
Decision Date: 25 June 2026

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