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आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने स्व-प्रमाणित व्हाट्सएप चैट को अदालती साक्ष्य के रूप में उपयोग करने की अनुमति दी।

Shivam
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आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 65B की शर्तें पूरी होने पर स्वयं प्रमाणित व्हाट्सऐप चैट, ईमेल और डिजिटल रिकॉर्ड अदालत में सबूत के रूप में स्वीकार किए जा सकते हैं।

आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने स्व-प्रमाणित व्हाट्सएप चैट को अदालती साक्ष्य के रूप में उपयोग करने की अनुमति दी।

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि व्हाट्सऐप चैट, ईमेल प्रिंट, स्क्रीनशॉट, डिजिटल फोटो और DVD जैसे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड अदालत में सबूत के रूप में स्वीकार किए जा सकते हैं, यदि उनके साथ भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65B के अनुसार वैध प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया गया हो।

न्यायमूर्ति रवि चीमालापति ने यह आदेश एक वैवाहिक विवाद से जुड़े सिविल रिवीजन याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। मामला अमलापुरम की सीनियर सिविल जज अदालत में लंबित तलाक याचिका से संबंधित था।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता ने तलाक मामले की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त दस्तावेज रिकॉर्ड पर लेने और एक गवाह को दोबारा बुलाने की अनुमति मांगी थी। ट्रायल कोर्ट ने इन आवेदनों को मंजूर भी कर दिया था।

इसके बाद याचिकाकर्ता ने व्हाट्सऐप स्टेटस, ईमेल प्रिंट, व्हाट्सऐप स्क्रीनशॉट, डिजिटल फोटो और HP DVD को रिकॉर्ड पर लाने का प्रयास किया। इसके समर्थन में उसने धारा 65B के तहत स्वयं द्वारा जारी प्रमाणपत्र भी दाखिल किया।

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हालांकि, प्रतिवादी पक्ष ने यह कहते हुए आपत्ति जताई कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तब तक स्वीकार नहीं किए जा सकते जब तक किसी “उचित प्राधिकारी” द्वारा जारी प्रमाणपत्र पेश न किया जाए। इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट ने कई दस्तावेजों को प्रदर्शित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि जिस व्यक्ति के पास मोबाइल या डिवाइस का वैध नियंत्रण हो, वह स्वयं भी धारा 65B का प्रमाणपत्र जारी कर सकता है।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले अर्जुन पंडितराव खोतकर बनाम कैलाश किशनराव गोरंट्याल का हवाला देते हुए कहा कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के लिए धारा 65B प्रमाणपत्र अनिवार्य है, लेकिन यह प्रमाणपत्र केवल किसी सरकारी अधिकारी द्वारा ही जारी होना जरूरी नहीं है।

पीठ ने कहा,

“डिवाइस के वैध नियंत्रण में रहने वाला व्यक्ति भी ऐसा प्रमाणपत्र जारी कर सकता है।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रमाणपत्र में यह बताया जाना चाहिए कि रिकॉर्ड किस प्रकार तैयार किया गया, किस डिवाइस से लिया गया और डिवाइस सही तरीके से कार्य कर रहा था या नहीं।

हाईकोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट ने यह मानकर गलती की कि केवल “उचित प्राधिकारी” का प्रमाणपत्र ही धारा 65B की शर्त पूरी कर सकता है।

अदालत ने ट्रायल कोर्ट के उस हिस्से को रद्द करते हुए निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए स्वयं प्रमाणपत्र की जांच करे। यदि प्रमाणपत्र कानून की आवश्यकताओं को पूरा करता है, तो व्हाट्सऐप रिकॉर्ड, ईमेल प्रिंट, स्क्रीनशॉट, डिजिटल फोटो और DVD को सबूत के रूप में रिकॉर्ड पर लिया जाए।

इसके साथ ही सिविल रिवीजन याचिका का निपटारा कर दिया गया। अदालत ने लागत को लेकर कोई आदेश पारित नहीं किया।

Case Details

Case Title: X and Y

Case Number: Civil Revision Petition No.1239/2024

Judge: Justice Ravi Cheemalapati

Decision Date: 29 April 2026

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