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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने बाल विवाह की पीड़िता पत्नी के भरण-पोषण में बढ़ोतरी की, कहा- उसे उचित गुजारा भत्ते से वंचित नहीं किया जा सकता.

Shivam
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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने बाल विवाह की शिकार महिला के भरण-पोषण की राशि को 2,000 रुपये से बढ़ाकर 6,000 रुपये प्रति माह कर दिया है, यह मानते हुए कि महिला उचित वित्तीय सहायता और सम्मान की हकदार है।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने बाल विवाह की पीड़िता पत्नी के भरण-पोषण में बढ़ोतरी की, कहा- उसे उचित गुजारा भत्ते से वंचित नहीं किया जा सकता.

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बाल विवाह की शिकार महिला को पर्याप्त और सम्मानजनक भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने फैमिली कोर्ट द्वारा तय ₹2,000 प्रतिमाह के गुजारा भत्ते को बढ़ाकर ₹6,000 प्रतिमाह कर दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

पत्नी ने 7 अगस्त 2021 को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत भरण-पोषण याचिका दायर की थी। उसका कहना था कि 27 अप्रैल 2015 को उसका विवाह हुआ था, लेकिन बाद में उसे उपेक्षा और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उसने अपने निर्वाह के लिए मासिक भरण-पोषण की मांग की थी।

दूसरी ओर, पति ने दावा किया कि विवाह के समय पत्नी की उम्र केवल 13 वर्ष थी और उनके बीच वैवाहिक संबंध स्थापित नहीं हुए थे।

न्यायमूर्ति गजेन्द्र सिंह ने कहा कि यदि पति का पक्ष भी स्वीकार कर लिया जाए, तब भी यह स्पष्ट है कि पत्नी बाल विवाह की पीड़िता रही है। अदालत ने टिप्पणी की,

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“वह पहले बाल विवाह की शिकार बनी और अब उसे मात्र नाममात्र का भरण-पोषण देकर फिर से पीड़ित किया जा रहा है।”

अदालत ने माना कि वर्तमान परिस्थितियों में ₹2,000 प्रतिमाह की राशि उचित नहीं कही जा सकती।

हाईकोर्ट ने पुनरीक्षण याचिका आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए पत्नी का मासिक भरण-पोषण ₹2,000 से बढ़ाकर ₹6,000 कर दिया। साथ ही निर्देश दिया कि यह बढ़ी हुई राशि 7 अगस्त 2021, यानी मूल आवेदन की तारीख से देय होगी।

अदालत ने यह भी कहा कि बाल विवाह कराने वाले माता-पिता अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।

Case Details:

Case Title: Ranu v. Himashu

Case Number: Criminal Revision No. 2566 of 2023

Judge: Justice Gajendra Singh

Decision Date: 29 May 2026

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