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नोटरी से किया गया तलाक या विवाह हिंदू कानून में वैध नहीं, ऐसे दावे पर फैमिली पेंशन नहीं मिल सकती: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट

Shivam
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा कि हिंदू कानून के तहत नोटरी से प्रमाणित तलाक और शादी के समझौतों की कोई कानूनी मान्यता नहीं है और फैमिली पेंशन व सर्विस बेनिफिट्स के दावे को खारिज कर दिया। - राम कृपाल सिंह बनाम मध्य प्रदेश राज्य व अन्य

नोटरी से किया गया तलाक या विवाह हिंदू कानून में वैध नहीं, ऐसे दावे पर फैमिली पेंशन नहीं मिल सकती: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल नोटरी के माध्यम से तैयार किए गए तलाकनामा या विवाह अनुबंध (Marriage Agreement) को हिंदू विवाह अधिनियम के तहत कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि यदि पहला विवाह विधिक रूप से समाप्त नहीं हुआ है, तो बाद में किए गए ऐसे किसी भी विवाह का कोई कानूनी अस्तित्व नहीं होगा। इसी आधार पर अदालत ने एक व्यक्ति की फैमिली पेंशन और अन्य सेवा संबंधी लाभों की मांग खारिज कर दी।

मामले की पृष्ठभूमि

अपीलकर्ता ने दावा किया था कि वह एक दिवंगत सरकारी कर्मचारी का पति है और इसलिए उसे फैमिली पेंशन, टर्मिनल बेनिफिट्स तथा अन्य वित्तीय लाभ दिए जाएं। उसका कहना था कि महिला ने अपने पहले पति से अलग होने के बाद उससे विवाह किया था।

हालांकि, राज्य सरकार ने इस दावे का विरोध करते हुए अदालत को बताया कि सरकारी सेवा अभिलेखों और विधिक उत्तराधिकारी प्रमाणपत्र में महिला के पति के रूप में किसी अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज है। सरकार का कहना था कि अपीलकर्ता का नाम कहीं भी कानूनी पति के रूप में दर्ज नहीं है, इसलिए वह किसी भी सेवा लाभ का अधिकारी नहीं है।

अपील के दौरान अपीलकर्ता ने नोटरी से तैयार कथित तलाकनामा, विवाह अनुबंध, मृत्यु प्रमाणपत्र तथा अन्य दस्तावेज पेश कर अपने दावे को सही साबित करने का प्रयास किया।

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अदालत की टिप्पणी

डिवीजन बेंच ने मूल सेवा अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद पाया कि सरकारी रिकॉर्ड में लगातार महिला के पति के रूप में उसके पहले पति का ही नाम दर्ज था। अदालत ने यह भी पाया कि वर्ष 2004 में जब छुट्टी के आवेदन में अलग नाम आने पर विभाग ने स्पष्टीकरण मांगा था, तब स्वयं महिला ने लिखित रूप से स्पष्ट किया था कि उसका पति वही व्यक्ति है जिसका नाम पहले से सेवा पुस्तिका में दर्ज है और अपीलकर्ता से उसका कोई संबंध नहीं है।

अदालत ने कहा,

"केवल नोटरी से तैयार किए गए तलाक के समझौते के आधार पर विवाह समाप्त नहीं हो सकता।"

पीठ ने स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत विवाह केवल सक्षम न्यायालय द्वारा पारित तलाक की डिक्री से ही समाप्त होता है। निजी समझौते या नोटरी से प्रमाणित दस्तावेज से विवाह समाप्त नहीं माना जा सकता।

इसके बाद अदालत ने कथित विवाह अनुबंध पर भी विचार किया और कहा,

"हिंदू कानून में विवाह कोई अनुबंध (Contract) नहीं है, इसलिए केवल नोटरी से विवाह अनुबंध बनाकर वैध विवाह नहीं किया जा सकता।"

अदालत ने यह भी कहा कि चूंकि पहले विवाह को समाप्त करने के लिए कभी कोई न्यायिक डिक्री प्राप्त नहीं की गई, इसलिए वह विवाह कानून की नजर में जारी रहा। ऐसे में बाद में किए गए किसी भी कथित विवाह को वैध नहीं माना जा सकता।

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि यह मान भी लिया जाए कि दोनों लंबे समय तक साथ रहे, तब भी ऐसा संबंध हिंदू विवाह अधिनियम की अनिवार्य शर्तों को दरकिनार नहीं कर सकता, जब पहला विवाह विधिक रूप से अभी भी अस्तित्व में हो।

फैसला

सभी दस्तावेजों और कानूनी प्रावधानों पर विचार करने के बाद हाई कोर्ट ने माना कि अपीलकर्ता यह साबित नहीं कर सका कि वह दिवंगत कर्मचारी का वैध पति था। इसलिए उसे फैमिली पेंशन, टर्मिनल बेनिफिट्स या अन्य सेवा संबंधी लाभ पाने का कोई अधिकार नहीं है।

इन्हीं कारणों से अदालत ने अपील खारिज करते हुए एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखा।

Case Details

Case Title: Ram Kripal Singh v. State of Madhya Pradesh & Others

Case Number: Writ Appeal No. 1624 of 2026

Judge: Justice G. S. Ahluwalia and Justice Anuradha Shukla

Decision Date: 1 July 2026

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