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जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट: करुणामूलक नियुक्ति पर उच्च पद का दावा अधिकार नहीं, स्टोरकीपर पद पर नियुक्ति का आदेश रद्द

Vivek G.
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जम्मू और कश्मीर राज्य बनाम जावेद अहमद गनई, जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा कि करुणामूलक नियुक्ति पर उच्च पद का दावा अधिकार नहीं। स्टोरकीपर नियुक्ति संबंधी एकल न्यायाधीश का आदेश रद्द।

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट: करुणामूलक नियुक्ति पर उच्च पद का दावा अधिकार नहीं, स्टोरकीपर पद पर नियुक्ति का आदेश रद्द

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट की श्रीनगर पीठ ने करुणामूलक नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया कि ऐसी नियुक्ति पर किसी उच्च पद का दावा अधिकार के रूप में नहीं किया जा सकता। अदालत ने एकल न्यायाधीश के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें याचिकाकर्ता को स्टोरकीपर पद पर नियुक्त मानने का निर्देश दिया गया था।

यह फैसला जस्टिस सिंधु शर्मा और जस्टिस शाहज़ाद अज़ीम की खंडपीठ ने सुनाया।

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मामले की पृष्ठभूमि

रिकॉर्ड के अनुसार, अनंतनाग के निवासी जावेद अहमद गनई को 13 सितंबर 2000 को करुणामूलक आधार पर डिप्टी कमिश्नर, अनंतनाग द्वारा स्टोरकीपर पद पर नियुक्ति का आदेश दिया गया था। हालांकि बाद में यह कहा गया कि स्टोरकीपर का पद प्रमोशनल पोस्ट है, इसलिए उन्हें उस पद पर जॉइन करने की अनुमति नहीं दी गई।

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इसके बजाय उन्हें कृषि विभाग में क्लास-IV पद पर नियुक्त कर दिया गया और उसी पद पर काम करने को कहा गया। बाद में उनके उच्च पद के दावे को सरकार ने 2008 के आदेश के जरिए खारिज कर दिया और यह माना कि उनकी नियुक्ति क्लास-IV पद पर ही मानी जाएगी।

इस आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

एकल न्यायाधीश का फैसला

मामले की सुनवाई करते हुए 2015 में एकल न्यायाधीश ने सरकार का आदेश रद्द कर दिया था। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने क्लास-IV पद पर काम करते हुए आवश्यक अनुभव हासिल कर लिया है, इसलिए उन्हें स्टोरकीपर के रूप में माना जा सकता है।

साथ ही यह भी कहा गया कि भले ही उन्हें उस पद का वेतन न मिले, लेकिन अन्य सभी उद्देश्यों के लिए उन्हें स्टोरकीपर माना जाएगा।

इस फैसले को राज्य सरकार ने Letters Patent Appeal के माध्यम से चुनौती दी।

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हाईकोर्ट की मुख्य टिप्पणियां

खंडपीठ ने करुणामूलक नियुक्ति के सिद्धांतों पर सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया। अदालत ने कहा कि ऐसी नियुक्ति सामान्य भर्ती प्रक्रिया का अपवाद होती है और इसका उद्देश्य केवल मृत कर्मचारी के परिवार को आर्थिक संकट से उबारना होता है।

पीठ ने कहा:“करुणामूलक नियुक्ति किसी उच्च पद पर दावा करने का अधिकार नहीं देती। यह केवल नियमों के अनुसार उपलब्ध पद पर ही दी जा सकती है।”

अदालत ने यह भी माना कि स्टोरकीपर पद एक प्रमोशनल पोस्ट है और उसके लिए निर्धारित योग्यता व अनुभव की शर्तें पूरी करनी होती हैं।

अदालत का निष्कर्ष

पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने क्लास-IV पद स्वीकार कर लिया था, इसलिए बाद में उसी आधार पर उच्च पद का दावा नहीं किया जा सकता।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा:“एक बार करुणामूलक आधार पर नियुक्ति स्वीकार कर लेने के बाद किसी अन्य या उच्च पद के लिए पुनः दावा नहीं किया जा सकता।”

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी अन्य व्यक्ति को नियमों के विपरीत लाभ दिया गया हो तो उससे समानता का दावा नहीं किया जा सकता।

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फैसला

इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील स्वीकार कर ली। अदालत ने 10 जुलाई 2015 के एकल न्यायाधीश के फैसले को रद्द कर दिया और कहा कि याचिकाकर्ता को स्टोरकीपर पद पर पदोन्नति केवल भर्ती नियमों के अनुसार ही मिल सकती है।

Case Title: State of Jammu & Kashmir vs Javaid Ahmad Ganai

Case No.: LPASW No. 145/2018

Decision Date: 27 February 2026

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