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CAPF भर्ती में मेडिकल अनफिट: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने तीसरी जांच से किया इनकार

Vivek G.
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यूनिस अली बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य, CAPF भर्ती में मेडिकल अनफिट पर जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, रिव्यू मेडिकल बोर्ड का निर्णय अंतिम माना।

CAPF भर्ती में मेडिकल अनफिट: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने तीसरी जांच से किया इनकार

जम्मू में बैठे कोर्ट रूम में शुक्रवार को जब फैसला सुनाया गया, तो माहौल शांत था। High Court of Jammu & Kashmir and Ladakh ने साफ शब्दों में कहा कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) भर्ती में रिव्यू मेडिकल बोर्ड का फैसला अंतिम होता है। अदालत ने याचिकाकर्ता यूनिस अली की वह मांग ठुकरा दी, जिसमें उन्होंने तीसरी बार मेडिकल जांच कराने का आदेश देने की गुहार लगाई थी।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला CAPF में कांस्टेबल (GD) भर्ती से जुड़ा है। कर्मचारी चयन आयोग ने नवंबर 2023 में विज्ञापन जारी किया था। यूनिस अली ने आवेदन किया, परीक्षा दी और शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) तथा दस्तावेज़ सत्यापन भी पास कर लिया।

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लेकिन 29 अक्टूबर 2024 को हुई विस्तृत मेडिकल जांच (DME) में उन्हें मायोपिया (नज़दीक की दृष्टि दोष), स्क्विंट (भेंगापन) और नॉक-नी (घुटनों का आपस में टकराना) के आधार पर अनफिट घोषित कर दिया गया। उन्हें रिव्यू मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने का अवसर दिया गया।

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5 नवंबर 2024 को हुई रिव्यू जांच में मायोपिया और नॉक-नी से तो उन्हें राहत मिल गई, लेकिन दाहिनी आंख में स्क्विंट पाए जाने के कारण फिर से अनफिट करार दिया गया।

याचिकाकर्ता ने इसके बाद सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल, जम्मू के नेत्र विभाग से जांच कराई। वहां के डॉक्टर ने ओपीडी कार्ड पर लिखा कि उन्हें स्क्विंट नहीं है। इसी आधार पर उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।

याचिकाकर्ता की दलील

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने कोर्ट में कहा, “रिव्यू मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट गलत है। सरकारी मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ ने स्पष्ट लिखा है कि स्क्विंट मौजूद नहीं है।”

दलील यह भी दी गई कि मेडिकल जांच जल्दबाजी में और सतही तरीके से की गई। इसलिए एक स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड गठित कर दोबारा जांच कराई जानी चाहिए।

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केंद्र सरकार का पक्ष

केंद्र की ओर से पेश वकील ने कहा कि मौजूदा मेडिकल नीति में तीसरी जांच का कोई प्रावधान नहीं है। गृह मंत्रालय के 24 अगस्त 2005 के निर्देशों का हवाला देते हुए बताया गया कि रिव्यू मेडिकल बोर्ड के निर्णय के खिलाफ कोई अपील स्वीकार नहीं की जाती।

सरकार ने यह भी कहा कि “सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए शारीरिक और चिकित्सीय फिटनेस सर्वोपरि है। विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा दिए गए निष्कर्षों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।”

अदालत की टिप्पणी

मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस संजय धर ने कहा कि प्रश्न यह है कि क्या किसी बाहरी डॉक्टर की राय के आधार पर रिव्यू मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को खारिज किया जा सकता है?

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कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के दो फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया के तहत गठित मेडिकल बोर्ड की राय को सामान्यतः चुनौती नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा, “मेडिकल फिटनेस का आकलन विशेषज्ञों का विषय है। जब तक यह साबित न हो कि प्रक्रिया में गड़बड़ी या दुर्भावना रही है, तब तक न्यायालय हस्तक्षेप नहीं करेगा।”

न्यायालय ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ता ने कहीं भी यह आरोप नहीं लगाया कि मेडिकल बोर्ड ने नियमों का उल्लंघन किया या जानबूझकर गलत रिपोर्ट दी।

अदालत ने कहा, “सिर्फ ओपीडी कार्ड पर दर्ज राय के आधार पर तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों के बोर्ड की रिपोर्ट को दरकिनार नहीं किया जा सकता।”

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अंतिम फैसला

कोर्ट ने माना कि CAPF भर्ती प्रक्रिया में मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को अंतिम माना गया है। नियमों में तीसरी बार मेडिकल जांच का प्रावधान नहीं है।

अदालत ने स्पष्ट कहा कि इस मामले में न तो कोई प्रक्रियात्मक त्रुटि साबित हुई और न ही किसी प्रकार की दुर्भावना। ऐसे में न्यायिक समीक्षा की गुंजाइश नहीं बनती।

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

Case Title: Younis Ali vs Union of India & Ors

Case No.: WP(C) No. 2820/2024

Decision Date: 13 February 2026

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