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जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने विदेशी नौकरी पर CAT का आदेश रद्द किया, विश्वविद्यालय को 4 हफ्ते में फैसला करने का निर्देश

Vivek G.
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शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय एवं अन्य बनाम डॉ. अंकुर शर्मा एवं अन्य, जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने विदेशी नौकरी मामले में CAT का आदेश रद्द किया, SKUAST को 4 हफ्ते में नियमों के तहत फैसला करने का निर्देश।

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने विदेशी नौकरी पर CAT का आदेश रद्द किया, विश्वविद्यालय को 4 हफ्ते में फैसला करने का निर्देश

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SKUAST) को राहत दी है। अदालत ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक प्रोफेसर को विदेशी विश्वविद्यालय में नौकरी के लिए पोस्ट-फैक्टो (बाद में) अनुमति देने का निर्देश दिया गया था।

फैसला न्यायमूर्ति सिंधु शर्मा और न्यायमूर्ति शाहजाद अजीम की खंडपीठ ने सुनाया।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला डॉ. अंकुर शर्मा से जुड़ा है, जो SKUAST में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थीं। उन्होंने अक्टूबर 2024 में यूनाइटेड अरब एमिरेट्स यूनिवर्सिटी (UAEU) में एक पद के लिए ऑनलाइन आवेदन करने और इंटरव्यू में भाग लेने की अनुमति मांगी थी।

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विश्वविद्यालय से औपचारिक अनुमति नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने आवेदन किया और इंटरव्यू में शामिल हुईं। बाद में उन्हें जनवरी 2025 से जुलाई 2028 तक के लिए नियुक्ति का प्रस्ताव मिला।

इस बीच, विश्वविद्यालय ने 18 दिसंबर 2024 को उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। आरोप था कि उन्होंने बिना पूर्व अनुमति विदेशी रोजगार के लिए आवेदन और इंटरव्यू में भाग लिया।

डॉ. शर्मा ने CAT का दरवाजा खटखटाया। अधिकरण ने विश्वविद्यालय की कार्रवाई को गलत मानते हुए नोटिस रद्द कर दिया और पोस्ट-फैक्टो अनुमति देने का निर्देश दिया।

विश्वविद्यालय की दलील

विश्वविद्यालय ने हाईकोर्ट में कहा कि बिना पूर्व अनुमति विदेशी नौकरी के लिए आवेदन करना सेवा नियमों का उल्लंघन है।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि “विदेश में रोजगार लेने की अनुमति देना या न देना नियोक्ता के विवेकाधिकार (discretion) का मामला है।”

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उनका कहना था कि CAT ने नियमों की गलत व्याख्या की और अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश पारित किया।

कोर्ट की कानूनी पड़ताल

खंडपीठ ने जम्मू-कश्मीर सिविल सेवा विनियम (CSR), अवकाश नियम (Leave Rules) और आचरण नियम (Conduct Rules) का विस्तार से विश्लेषण किया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि CSR की अनुसूची XIX विदेशी नियुक्ति के मामलों को तीन श्रेणियों में बांटती है। डॉ. शर्मा का मामला उस श्रेणी में आता है, जिसमें कर्मचारी स्वयं विदेशी नौकरी का प्रस्ताव प्राप्त करता है।

कोर्ट ने कहा कि नियम साफ बताते हैं-यदि कोई सरकारी कर्मचारी बिना पूर्व अनुमति विदेश में नौकरी स्वीकार करता है, तो यह नियमों का उल्लंघन है और उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।

पीठ ने कहा:

“जहां अनुमति देने का विवेकाधिकार नियोक्ता के पास है, वहां अधिकरण स्वयं अनुमति देने का निर्देश नहीं दे सकता।”

अदालत ने यह भी कहा कि आचरण नियम 10(1) के तहत कोई भी सरकारी कर्मचारी बिना पूर्व स्वीकृति किसी अन्य रोजगार में नहीं जा सकता।

“बिना पूर्व अनुमति विदेशी नियुक्ति स्वीकार करना कदाचार (misconduct) की श्रेणी में आ सकता है,” पीठ ने टिप्पणी की।

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CAT के आदेश पर टिप्पणी

हाईकोर्ट ने कहा कि अधिकरण ने केवल एक कारण बताओ नोटिस के आधार पर हस्तक्षेप किया, जबकि अंतिम निर्णय अभी विश्वविद्यालय को लेना था।

पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि केवल कारण बताओ नोटिस को चुनौती देना सामान्यतः उचित नहीं होता, जब तक कि वह पूरी तरह अवैध न हो।

“अधिकरण ने सक्षम प्राधिकारी के स्थान पर स्वयं निर्णय लेकर अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़ने का प्रयास किया,” अदालत ने कहा।

अंतिम निर्णय

अदालत ने CAT का 18 फरवरी 2025 का आदेश रद्द कर दिया।

हालांकि, न्यायालय ने संतुलन बनाते हुए विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि वह डॉ. शर्मा के आवेदन पर कानून के अनुसार चार सप्ताह के भीतर कारणयुक्त (speaking) आदेश पारित करे।

याचिका इसी निर्देश के साथ निपटा दी गई।

Case Title: Sher-e-Kashmir University of Agricultural Sciences & Technology & Ors. v. Dr. Ankur Sharma & Anr.

Case No.: WP (C) No. 634/2025

Decision Date: 27 February 2026

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