Logo

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट सख्त: न्यायाधीशों पर बेबुनियाद आरोपों पर लगाई रोक, माफी दाखिल करने का निर्देश

Rajan Prajapati
Add Court Book as a preferred source on Google

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने जजों पर बेबुनियाद आरोप लगाने पर सख्ती दिखाते हुए याचिकाकर्ताओं को बिना शर्त माफी दाखिल करने का निर्देश दिया। - असदुल्लाह भट और अन्य बनाम गुल दार और अन्य

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट सख्त: न्यायाधीशों पर बेबुनियाद आरोपों पर लगाई रोक, माफी दाखिल करने का निर्देश

जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय के खिलाफ़ एक अहम् गोदाम में कारखाने के अधिकारियों ने "बेबुनियाद और गंभीर सामान" पर कठोर रुख दिखाया। अदालत ने केवल आवेदन पत्र वापस लेने की मंजूरी को अस्वीकार कर दिया, बल्कि उत्पादों को बिना शर्त माफ़ी भुगतान करने का निर्देश भी दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला असदुल्ला भट और अन्य बनाम गुल डार और अन्य का है, जिसमें कंपनियों ने अपने पोस्टर आवेदन में यह आरोप लगाया था कि पैटन के सब-जज और बारामूला के प्रधान जिला न्यायाधीश प्रभावित होकर काम कर रहे हैं।

याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि इन परिस्थितियों में उन्हें निष्पक्ष न्याय नहीं मिलेगा और इसलिए मामले को किसी अन्य अदालत में स्थानांतरित किया जाए।

हालांकि, सुनवाई के दौरान जब अदालत ने इन आरोपों पर स्पष्टीकरण मांगा, तो याचिकाकर्ताओं के वकील इन आरोपों को साबित नहीं कर सके और उन्होंने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

Read also:- इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने NCLT के दिल्ली ट्रांसफर आदेश पर रोक लगाई, देरी पर जताई चिंता

जस्टिस वसीम सादिक नरगल की एकल पीठ ने इस बात को स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में केवल याचिका वापस नहीं ली जाएगी।

अदालत ने कहा कि,

“इस तरह के गंभीर और अप्रमाणित आरोप न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता पर सीधा आघात करते हैं। ऐसे आरोपों को बिना जांच के वापस लेने देना कानून के विपरीत होगा।”

पीठ ने यह भी कहा कि न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ इस प्रकार के आरोप केवल व्यक्तिगत नहीं होते, बल्कि पूरे न्यायिक तंत्र की विश्वसनीयता को प्रभावित करते हैं।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखना बेहद जरूरी है और बिना सबूत के आरोप लगाना न्याय व्यवस्था को कमजोर करता है।

अदालत ने याचिकाकर्ताओं के वकील के आचरण पर भी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि एक अनुभवी अधिवक्ता से अपेक्षा की जाती है कि वह तथ्यों की पुष्टि के बाद ही ऐसे आरोपों को याचिका में शामिल करे।

हालांकि, अदालत ने फिलहाल वकील के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की, लेकिन भविष्य के लिए कड़ी चेतावनी जरूर दी।

Read also:- बॉम्बे हाई कोर्ट ने शादी से पहले एक व्यक्ति को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की, जमानत याचिका पर फैसला होने तक गिरफ्तारी न करने का निर्देश दिया।

अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि:

• सभी याचिकाकर्ता एक सप्ताह के भीतर व्यक्तिगत रूप से हलफनामे के माध्यम से बिना शर्त माफी दाखिल करें।

• माफी में सच्चा पछतावा और भविष्य में इस तरह के आरोप न लगाने का आश्वासन शामिल होना चाहिए।

अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है ताकि न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनी रहे।

मामले को आगे की सुनवाई के लिए 6 मई 2026 को सूचीबद्ध किया गया है।

Case Details

Case Title: Assadullah Bhat & Others vs Gul Dar & Others

Case Number: TrP (C) 4/2026

Judge: Justice Wasim Sadiq Nargal

Decision Date: April 29, 2026

Download Judgment

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates