कर्नाटक हाईकोर्ट, धारवाड़ खंडपीठ ने 23 अगस्त 2025 को निचली अदालत के बरी करने के आदेश को रद्द करते हुए बेनका स्पंज आयरन प्रा. लि. और इसके निदेशक अजय कुमार भुवाल्का को चेक बाउंस मामले में दोषी ठहराया। अदालत ने दोनों को ₹2 करोड़ का जुर्माना भरने का आदेश दिया है। यदि जुर्माना जमा नहीं किया गया तो निदेशक को छह महीने की साधारण कैद भुगतनी होगी।
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मामले की पृष्ठभूमि
शिकायतकर्ता श्री कमल कुमार जैन, जो एम.के. मिनरल्स, होस्पेटे के स्वामी हैं, ने वर्ष 2008 से 2009 के बीच आरोपित कंपनी को आयरन ओर और अन्य उत्पाद की आपूर्ति की थी। शुरुआत में आंशिक भुगतान किया गया, लेकिन ₹1,56,87,624 की बड़ी बकाया राशि बाकी रह गई।
जुलाई 2011 में निदेशक ने बकाया चुकाने के लिए ₹50 लाख के दो चेक जारी किए, जो आईडीबीआई बैंक, बेंगलुरु पर खींचे गए थे। लेकिन 15 फरवरी 2012 को ये दोनों चेक “अपर्याप्त धनराशि” के कारण अस्वीकृत हो गए। इसके बाद 3 मार्च 2012 को कानूनी नोटिस भेजा गया, लेकिन न तो भुगतान किया गया और न ही जवाब दिया गया।
नवंबर 2017 में अतिरिक्त सिविल जज और जेएमएफसी, होस्पेटे ने आरोपियों को बरी कर दिया था। अदालत ने कहा था कि शिकायतकर्ता कानूनी रूप से वसूल योग्य ऋण साबित नहीं कर पाए और नोटिस की सेवा तथा चेक साक्ष्य की वैधता पर भी सवाल उठाए थे।
न्यायमूर्ति सी.एम. पूनाचा ने लेजर खातों, चालानों और धारा 139, एन.आई. एक्ट के तहत मौजूद “प्रारंभिक अनुमान” का हवाला देते हुए कहा कि आरोपी की देनदारी स्पष्ट रूप से सिद्ध है।
शुरुआत में अनुमान शिकायतकर्ता के पक्ष में होता है… आरोपी केवल संभावनाओं के संतुलन के आधार पर ही इसे खंडित कर सकता है।
अदालत ने अधिकार-क्षेत्र पर आरोपियों की दलील खारिज कर दी, यह कहते हुए कि चेक एक्सिस बैंक, होस्पेटे शाखा में जमा किए गए थे, इसलिए होस्पेटे अदालत को अधिकार था।
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हाईकोर्ट ने निचली अदालत का आदेश रद्द करते हुए कहा:
“आरोपी संख्या 1 और 2 दोषी ठहराए जाते हैं… और चार महीने के भीतर ₹2 करोड़ का संयुक्त जुर्माना भरें। अन्यथा आरोपी संख्या 2 को छह महीने की साधारण कैद भुगतनी होगी।”
अदालत ने यह भी आदेश दिया कि ₹1.98 करोड़ शिकायतकर्ता को दिया जाएगा, जबकि ₹2 लाख राज्य को जमा होगा।
केस टाइटल: श्री कमल कुमार जैन बनाम बेनका स्पंज आयरन प्रा. लि. एवं अन्य
केस नंबर: क्रिमिनल अपील नंबर 100030/2018