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मृतक के रिश्तेदार या वकील होने पर मुकदमे का स्थानांतरण नहीं किया जा सकत: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय

Shivam
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एमपी हाईकोर्ट ने कहा कि केवल आशंका के आधार पर ट्रायल ट्रांसफर नहीं किया जा सकता, ठोस सबूत आवश्यक हैं। - हिमांशु कटारे और अन्य बनाम मध्य प्रदेश राज्य और अन्य

मृतक के रिश्तेदार या वकील होने पर मुकदमे का स्थानांतरण नहीं किया जा सकत: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि केवल आशंकाओं के आधार पर किसी आपराधिक मुकदमे को दूसरी अदालत में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि न्यायपालिका की निष्पक्षता पर संदेह ठोस आधार के बिना नहीं किया जा सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ताओं ने ट्रायल ट्रांसफर की मांग करते हुए कहा कि मृतक के एक पुत्र उसी अदालत में कोर्ट रीडर के रूप में कार्यरत हैं और दूसरा पुत्र वहीं प्रैक्टिस करने वाला वकील है।

याचिकाकर्ताओं का दावा था कि इन परिस्थितियों के कारण उन्हें निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिल पा रही है और स्थानीय वकील उनके पक्ष में पेश होने से हिचक रहे हैं।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी ने कहा कि केवल इस आधार पर कि मृतक का एक रिश्तेदार कोर्ट स्टाफ में है या कोई अन्य वकील है, ट्रायल ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।

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अदालत ने स्पष्ट किया,

“कोर्ट रीडर एक मंत्रीस्तरीय कर्मचारी होता है, जिसका न्यायिक निर्णय प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं होता।”

इसी तरह, अदालत ने यह भी कहा कि किसी वकील का उसी अदालत में प्रैक्टिस करना भी अपने आप में ट्रायल को प्रभावित करने का आधार नहीं बनता।

बेंच ने आगे कहा,

“सिर्फ बिना ठोस प्रमाण के व्यक्त की गई आशंकाएं ट्रायल ट्रांसफर का आधार नहीं हो सकतीं।”

अदालत ने अपने आदेश में यह भी दोहराया कि किसी आपराधिक मामले को स्थानांतरित करना एक असाधारण शक्ति है, जिसका उपयोग बहुत सावधानी से किया जाना चाहिए।

बेंच ने कहा,

“ट्रांसफर तभी किया जा सकता है जब यह स्पष्ट और ठोस रूप से साबित हो कि न्याय नहीं हो पाएगा।”

अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि न्यायाधीश कानून और साक्ष्यों के आधार पर ही निर्णय लेते हैं और किसी व्यक्ति या उसके रिश्तेदारों की स्थिति से प्रभावित नहीं होते।

सभी तथ्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता अपने आरोपों को किसी ठोस साक्ष्य से साबित नहीं कर पाए हैं।

अंततः, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा कि निचली अदालतों के आदेशों में कोई त्रुटि नहीं है और याचिका में कोई मेरिट नहीं है।

इस आधार पर याचिका खारिज कर दी गई।

Case Details

Case Title: Himanshu Katare and Others vs State of Madhya Pradesh and Others

Case Number: MCRC No. 54491 of 2025

Judge: Justice Himanshu Joshi

Decision Date: March 24, 2026

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