मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है, जिसमें मध्य प्रदेश विधानसभा की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग की मांग की गई है। कोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति गजेन्द्र सिंह की खंडपीठ ने निर्देश दिया:
“प्रतिवादियों को 7 कार्यदिवस के भीतर पीएफ जमा करने पर नोटिस जारी किया जाए। नोटिस 4 सप्ताह में प्रत्युत्तर योग्य हो।”
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यह जनहित याचिका विधानसभा की कार्यवाही को जनता तक पारदर्शी रूप से पहुंचाने की मांग के साथ दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि विधानसभा में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि क्या कर रहे हैं, यह जानने का अधिकार नागरिकों को है, विशेष रूप से मध्य प्रदेश के लोगों को।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा:
“विधानसभा में उठाए जाने वाले प्रश्न, चर्चाएं और विधेयकों को पारित करने की प्रक्रिया आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करती है।”
ऐसे में इन कार्यवाहियों की लाइव स्ट्रीमिंग सार्वजनिक हित में होगी और सरकार की जवाबदेही को मजबूत करेगी।
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हालांकि भारत सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय ने 'नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (NeVA)' की शुरुआत कर विधानसभा की कार्यप्रणाली को डिजिटल करने का प्रयास किया है, लेकिन याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार ने इस दिशा में कोई गंभीर कदम नहीं उठाए हैं।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि उन्होंने फरवरी 2025 में पंजीकृत डाक के माध्यम से प्रतिवादियों को एक अभ्यावेदन भेजा था, जिसमें विधानसभा की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग/प्रसारण शुरू करने का अनुरोध किया गया था। लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
याचिका में यह भी दावा किया गया:
“जानने का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और बोलने के अधिकार (अनुच्छेद 19(1)(a)) का हिस्सा है और कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग इस संवैधानिक अधिकार को प्रभावी रूप से लागू करेगी।”
इस मामले की सुनवाई 17 अप्रैल 2025 को हुई, जिसमें कोर्ट ने प्रतिवादियों से चार सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने के लिए कहा है।
केस का शीर्षक: सचिन यादव बनाम मध्य प्रदेश राज्य, रिट याचिका संख्या 8063/2025