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न्यूज़लॉन्ड्री की महिला पत्रकारों ने अपमानजनक पोस्ट को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में अभिजीत अय्यर मित्रा के खिलाफ ₹2 करोड़ की मानहानि याचिका दायर की

Shivam Y.

न्यूज़लॉन्ड्री की नौ महिला पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर कथित रूप से यौन अपमानजनक पोस्ट को लेकर अभिजीत अय्यर मित्रा के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में ₹2 करोड़ की क्षतिपूर्ति और सार्वजनिक माफ़ी की मांग करते हुए मानहानि याचिका दायर की है।

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न्यूज़लॉन्ड्री की महिला पत्रकारों ने अपमानजनक पोस्ट को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में अभिजीत अय्यर मित्रा के खिलाफ ₹2 करोड़ की मानहानि याचिका दायर की
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डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म न्यूज़लॉन्ड्री की नौ महिला पत्रकारों ने दिल्ली हाईकोर्ट में अभिजीत अय्यर मित्रा के खिलाफ मानहानि की याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मित्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर उन्हें निशाना बनाते हुए यौन अपमानजनक और आपत्तिजनक पोस्ट किए।

इस मानहानि याचिका में ₹2 करोड़ के हर्जाने और एक सार्वजनिक माफ़ी की मांग की गई है। पत्रकारों का कहना है कि इन पोस्टों का उद्देश्य केवल उनकी गरिमा, प्रतिष्ठा और पेशेवर ईमानदारी को नुकसान पहुंचाना था। याचिका में मित्रा के सोशल मीडिया अकाउंट से अपमानजनक सामग्री को तुरंत हटाने की मांग भी की गई है।

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याचिका में शामिल पत्रकारों में मनीषा पांडे, ईशिता प्रदीप, सुहासिनी विश्वास, सुमेधा मित्तल, तीस्ता रॉय चौधरी, तस्नीम फ़ातिमा, प्रिया जैन, जयश्री अरुणाचलम और प्रियाली ढींगरा शामिल हैं। न्यूज़लॉन्ड्री संस्था स्वयं भी इस याचिका में एक वादी है।

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“पत्रकारिता कार्य की निष्पक्ष आलोचना स्वागत योग्य है, लेकिन किसी को भी व्यक्तिगत रूप से अपमानित करने का अधिकार नहीं है,”— वादियों द्वारा याचिका में कहा गया

याचिका के अनुसार, मित्रा ने अपने पोस्ट में पत्रकारों को “वेश्या” कहकर संबोधित किया और उनके कार्यस्थल को “कोठा” कहा। उन्होंने न्यूज़लॉन्ड्री के सब्सक्राइबर्स को भी हिंदी में “वेश्या” कहा, इस तथ्य की अनदेखी करते हुए कि उनके सदस्य डॉक्टर, वकील, शिक्षक, वैज्ञानिक, न्यायाधीश, अभियंता जैसे पेशों से जुड़े लोग हैं।

इस याचिका में यह भी ज़ोर दिया गया है कि यहां तक कि यौनकर्मी भी गरिमा रखते हैं, और “वेश्या” शब्द का अपशब्द के रूप में इस्तेमाल सिर्फ महिला पत्रकारों को नीचा दिखाने का काम नहीं करता बल्कि यौनकर्मियों के प्रति भी सामाजिक पूर्वाग्रह और हिंसा को बढ़ावा देता है।

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“कोई महिला/व्यक्ति अमानवीय व्यवहार के लायक नहीं है। कोई भी पेशा अपमानजनक शब्द के रूप में इस्तेमाल किए जाने का पात्र नहीं है। ऐसे शब्द महिलाओं — चाहे वे पत्रकार हों या यौनकर्मी — की पहचान, गरिमा और अधिकार को छीन लेते हैं,”— याचिका से उद्धरण

वादी पक्ष का तर्क है कि ऐसे बयान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, व्यंग्य या पत्रकारिता आलोचना के दायरे में नहीं आते। ये लैंगिक अपशब्द हैं, जो महिला पेशेवरों को नीचा दिखाने और डर व यौन उत्पीड़न के माहौल में काम करने को मजबूर करने का प्रयास करते हैं।

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“ये लैंगिक अपशब्द Plaintiff No. 10 के संगठन की महिला पेशेवरों को अपमानित करने के उद्देश्य से कहे गए हैं… और उनकी गरिमा और बिना भय के कार्य करने के अधिकार पर सीधा हमला करते हैं,”— याचिका से वर्णन

इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव द्वारा कल की जाएगी। यह याचिका अधिवक्ता उद्धव खन्ना और ध्रुव विग के माध्यम से दायर की गई है।

शीर्षक: मनीषा पांडे एवं अन्य बनाम अभिजीत अय्यर मित्रा एवं अन्य।

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