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सुप्रीम कोर्ट ने त्रिपुरा सरकार की भर्ती रद्द करने की अधिसूचना को खारिज किया

Vivek G.

सुप्रीम कोर्ट ने त्रिपुरा सरकार द्वारा TSR एनरोल्ड फॉलोअर्स की भर्ती रद्द करने का फैसला खारिज किया, कहा कार्यकारी आदेश वैधानिक नियमों को निरस्त नहीं कर सकते।

सुप्रीम कोर्ट ने त्रिपुरा सरकार की भर्ती रद्द करने की अधिसूचना को खारिज किया

सुप्रीम कोर्ट ने त्रिपुरा सरकार द्वारा त्रिपुरा स्टेट राइफल्स (TSR) में एनरोल्ड फॉलोअर्स की भर्ती प्रक्रिया रद्द करने के फैसले को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह निर्णय मनमाना और गैरकानूनी था क्योंकि भर्ती पहले ही वैधानिक नियमों के तहत करवाई जा चुकी थी।

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मामले की पृष्ठभूमि

मामला उस समय शुरू हुआ जब त्रिपुरा सरकार ने 14 मार्च 2018 को “अस्थगन ज्ञापन” (Abeyance Memorandum) जारी कर सभी भर्ती प्रक्रियाओं को रोक दिया। इसके बाद, 20 अगस्त 2018 को “रद्द ज्ञापन” (Cancellation Memorandum) जारी कर चल रही TSR भर्ती को नई नई भर्ती नीति (New Recruitment Policy – NRP) के तहत रद्द कर दिया गया।

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यह भर्ती 506 पदों के लिए थी, जिसमें राज्य के अंदर का कोटा (372 पद) और राज्य के बाहर का कोटा (134 पद) शामिल था। वर्ष 2016 में भर्ती रैलियां आयोजित हुईं, जिनमें शारीरिक परीक्षा, लिखित परीक्षा और इंटरव्यू शामिल थे। 2017 तक मेरिट लिस्ट तैयार कर ली गई थी और चरित्र सत्यापन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई थी।

लेकिन नियुक्ति पत्र जारी होने से पहले, नई सरकार ने प्रक्रिया रोक दी और ग्रुप-डी पदों के लिए इंटरव्यू समाप्त करने की नीति का हवाला दिया।

2019 में त्रिपुरा हाई कोर्ट ने रद्दीकरण को सही ठहराया, यह कहते हुए कि सरकार सार्वजनिक हित में अपनी भर्ती नीति बदल सकती है। साथ ही कहा गया कि अभ्यर्थियों को नियुक्ति का कोई पूर्ण अधिकार नहीं है।

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अपीलकर्ताओं ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। रिकॉर्ड की जांच के बाद कोर्ट ने कहा:

  • भर्ती प्रक्रिया त्रिपुरा स्टेट राइफल्स अधिनियम, 1983 और भर्ती नियम, 1984 के तहत हुई थी, जो वैधानिक प्रावधान हैं।
  • प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी थी, मेरिट लिस्ट और चरित्र सत्यापन लगभग पूरा हो चुका था।
  • नई भर्ती नीति (NRP), 2018 केवल एक कार्यकारी आदेश (executive order) थी और वह वैधानिक नियमों को निरस्त नहीं कर सकती।

कोर्ट ने कहा:

“कार्यकारी आदेश वैधानिक नियमों को समाप्त नहीं कर सकते। वे केवल पूरक हो सकते हैं, लेकिन अधिनियम और नियमों के तहत की गई भर्ती को केवल नई नीति के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता।”

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सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि NRP को पिछली भर्ती प्रक्रिया पर लागू करना ऐसा है मानो “खेल शुरू होने के बाद नियम बदल दिए गए हों।” चूंकि इंटरव्यू पहले ही हो चुके थे, इसलिए ग्रुप-डी पदों के लिए इंटरव्यू खत्म करने वाली नई नीति को लागू नहीं किया जा सकता था।

कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि केवल मेरिट लिस्ट में नाम आने से उम्मीदवारों को नियुक्ति का पूर्ण अधिकार (indefeasible right) नहीं मिलता। लेकिन उन्होंने यह वैध अपेक्षा (legitimate expectation) जरूर रखी थी कि प्रक्रिया निष्पक्ष रूप से पूरी होगी। राज्य सरकार इस फैसले को “बड़े सार्वजनिक हित” में साबित करने में असफल रही।

सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए 14 मार्च 2018 का अस्थगन ज्ञापन और 20 अगस्त 2018 का रद्द ज्ञापन दोनों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने त्रिपुरा सरकार को निर्देश दिया कि एनरोल्ड फॉलोअर्स की भर्ती प्रक्रिया तय समय सीमा में पूरी की जाए।

मामला: पार्थ दास एवं अन्य बनाम त्रिपुरा राज्य एवं अन्य

मामले का प्रकार: सिविल अपील (संख्या 4426-4466, वर्ष 2023 और 4473-4479, वर्ष 2023)

अपीलकर्ता:

  • पार्थ दास एवं अन्य
  • सुजान रॉय एवं अन्य

प्रतिवादी:

  • त्रिपुरा राज्य एवं अन्य

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