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हाथी ‘रमन’ को मंदिर कार्यक्रम में ले जाना पड़ा भारी: सुप्रीम कोर्ट ने मालिक को अवमानना का दोषी ठहराया, केरल सरकार को सौंपी अस्थायी कस्टडी

CB News Desk

सुप्रीम कोर्ट ने 'रमन' नाम के बंधक हाथी के मामले में दिए गए वचन का उल्लंघन करने पर एक व्यक्ति को अदालत की अवमानना ​​का दोषी ठहराया और केरल सरकार को निर्देश दिया कि वह अस्थायी रूप से उस हाथी को अपनी कस्टडी में ले ले। - जयकृष्ण मेनन बनाम कृष्णनकुट्टी और अन्य

हाथी ‘रमन’ को मंदिर कार्यक्रम में ले जाना पड़ा भारी: सुप्रीम कोर्ट ने मालिक को अवमानना का दोषी ठहराया, केरल सरकार को सौंपी अस्थायी कस्टडी
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सुप्रीम कोर्ट ने केरल के प्रसिद्ध हाथी ‘रमन’ को मंदिर गतिविधियों में इस्तेमाल किए जाने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए उसके संरक्षक कृष्णनकुट्टी को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया है। अदालत ने साथ ही हाथी की भलाई को प्राथमिकता देते हुए केरल सरकार को उसकी अस्थायी कस्टडी लेने और उसे किसी उपयुक्त रेस्क्यू या पुनर्वास केंद्र में रखने का निर्देश दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि

विवाद हाथी ‘रमन’ की कस्टडी और स्वामित्व को लेकर चल रहा है। जयकृष्ण मेनन का दावा है कि रमन माता अमृतानंदमयी मठ का हाथी है और उसे केवल देखभाल के लिए कृष्णनकुट्टी को सौंपा गया था। दूसरी ओर, कृष्णनकुट्टी का कहना है कि हाथी उन्हें वैध रूप से उपहार स्वरूप मिला था और पिछले कई वर्षों से वही उसकी देखभाल कर रहे हैं।

यह विवाद विभिन्न अदालतों से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। मामले के लंबित रहने के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाथी की कस्टडी को लेकर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था।

अगस्त 2025 में सुनवाई के दौरान कृष्णनकुट्टी की ओर से अदालत को आश्वासन दिया गया था कि अंतिम निर्णय होने तक रमन का उपयोग किसी भी व्यावसायिक या मंदिर संबंधी गतिविधि में नहीं किया जाएगा।

जयकृष्ण मेनन ने बाद में सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि अदालत के समक्ष दिए गए आश्वासन के बावजूद रमन को मंदिर उत्सवों, जुलूसों और अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों में ले जाया गया।

याचिकाकर्ता ने इसके समर्थन में तस्वीरें, पोस्टर और सोशल मीडिया सामग्री भी रिकॉर्ड पर रखी। वहीं कृष्णनकुट्टी ने इन आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि अधिकांश सामग्री पुरानी थी और अदालत के आदेश के बाद की नहीं थी।

हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि एक अवसर पर हाथी को मंदिर परिसर में ले जाया गया था और इसके लिए उन्होंने अदालत से बिना शर्त माफी भी मांगी।

सुप्रीम कोर्ट ने वन्यजीव अधिकारियों की रिपोर्ट और रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों का परीक्षण किया। रिपोर्ट में उल्लेख था कि फरवरी 2026 में निरीक्षण के दौरान रमन एक मंदिर उत्सव के लिए चावक्काड लाया गया था।

अदालत ने कृष्णनकुट्टी के लिखित जवाब का भी उल्लेख किया, जिसमें यह स्वीकार किया गया था कि दूसरे हाथी के अचानक बीमार पड़ जाने के कारण रमन को एक धार्मिक अनुष्ठान में शामिल किया गया।

इस पर पीठ ने कहा,

“यह स्पष्ट है कि हाथी रमन को अदालत के समक्ष दिए गए आश्वासन के विपरीत धार्मिक जुलूसों और अनुष्ठानों के लिए बाहर ले जाया गया।”

पीठ ने आगे कहा कि पशुओं की भलाई से जुड़े मामलों में अदालत मूक दर्शक नहीं बन सकती और ऐसे ‘नि:शब्द जीवों’ के हितों की रक्षा करना भी न्यायालय का दायित्व है।

हाथी के स्वास्थ्य और कल्याण को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को रमन की अस्थायी कस्टडी लेने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि हाथी को किसी उपयुक्त रेस्क्यू या पुनर्वास केंद्र में रखा जाए। यह व्यवस्था अंतिम निर्णय तक ही प्रभावी रहेगी।

साथ ही अदालत ने माना कि कृष्णनकुट्टी ने न्यायालय के समक्ष दिए गए आश्वासन का उल्लंघन किया है और उन्हें अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया।

हालांकि परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने केवल ₹2,000 का जुर्माना लगाया और चार सप्ताह के भीतर राशि जमा करने का निर्देश दिया।

राज्य के वन अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही समाप्त कर दी गई क्योंकि अदालत ने पाया कि उन्होंने निरीक्षण कराने का प्रयास किया था और उनके द्वारा आदेश की जानबूझकर अवहेलना नहीं की गई थी।

Case Details

Case Title: Jayakrishna Menon v. Krishnankutty & Others

Case Number: Contempt Petition (Civil) Nos. 59-60 of 2026 in Criminal Appeal Nos. 4836-4837 of 2024

Judge: Justice Dipankar Datta and Justice Satish Chandra Sharma

Decision Date: 09 June 2026

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