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बीमा सूची में नाम न होने पर भी हक नहीं छिन सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने विधवा को ₹25 लाख देने का आदेश दीया

Rajan Prajapati
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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि सूची में नाम न होने के बावजूद पात्र पुलिसकर्मी के परिवार को बीमा लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। - दमयंती नेगी बनाम उत्तराखंड राज्य और अन्य

बीमा सूची में नाम न होने पर भी हक नहीं छिन सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने विधवा को ₹25 लाख देने का आदेश दीया

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने साफ किया कि केवल प्रशासनिक गलती के कारण किसी पात्र व्यक्ति को बीमा लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला दामयंती नेगी बनाम राज्य उत्तराखंड व अन्य से जुड़ा है। याचिकाकर्ता के पति नरेंद्र सिंह नेगी, उत्तराखंड पुलिस में कांस्टेबल थे और SDRF में ड्राइवर के रूप में तैनात थे। 7 अगस्त 2021 को ड्यूटी के दौरान एक सड़क दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई।

याचिकाकर्ता ने “पुलिस के लिए निःशुल्क आकस्मिक मृत्यु बीमा कवर” योजना के तहत ₹25 लाख का दावा किया। यह योजना 12 अप्रैल 2021 से लागू हुई थी और इसमें पुलिस कर्मियों के लिए बीमा कवर का प्रावधान था, जिसका प्रीमियम बैंक द्वारा वहन किया जाना था।

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हालांकि, बैंक ने 21 मई 2022 के पत्र के माध्यम से दावा खारिज कर दिया। कारण बताया गया कि मृतक का नाम उस सूची में शामिल नहीं था, जिसे बीमा कवर के लिए तैयार किया गया था।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित ने स्पष्ट किया कि इस मामले का मुख्य सवाल यही है कि क्या केवल सूची में नाम न होने के आधार पर बीमा लाभ से इनकार किया जा सकता है।

अदालत ने कहा,

“ऐसी चूक प्रशासनिक स्तर की है और इसका खामियाजा याचिकाकर्ता को नहीं भुगतना चाहिए।”

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि मृतक कई वर्षों से उसी बैंक में सैलरी अकाउंट धारक थे और बैंक को उनकी नौकरी की जानकारी थी। ऐसे में बैंक यह नहीं कह सकता कि उसे जानकारी नहीं थी।

अदालत ने आगे कहा,

“बैंक अपनी ही गलती का फायदा नहीं उठा सकता और वैध हक को नकार नहीं सकता।”

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि योजना स्वचालित थी और इसके लिए अलग से आवेदन की जरूरत नहीं थी। मृतक सभी शर्तों को पूरा करते थे, इसलिए उनका हक बनता था।

वहीं, बैंक की ओर से कहा गया कि केवल उन्हीं कर्मचारियों को कवर दिया गया जिनका नाम सूची में था और जिनके लिए प्रीमियम जमा किया गया।

राज्य सरकार ने खुद को इस विवाद में औपचारिक पक्ष बताया और कहा कि योजना का संचालन बैंक से संबंधित है।

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अदालत ने बैंक के फैसले को “मनमाना और कानून के खिलाफ” करार दिया। कोर्ट ने 21 मई 2022 का आदेश रद्द करते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को ₹25 लाख की बीमा राशि दी जाए।

साथ ही, अदालत ने 5% वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश भी दिया, जो पात्रता की तारीख से लागू होगा।

Case details

Case Title: Damyanti Negi vs State of Uttarakhand & Others

Case Number: Writ Petition (Misc. Single) No. 2446 of 2022

Judge: Hon’ble Justice Pankaj Purohit

Decision Date: 19 March 2026

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