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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट में सजा रद्द की, 13 साल पुराने मामले में दो आरोपियों को राहत

Rajan Prajapati

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि केवल गैंग चार्ट और पुराने मुकदमों के आधार पर गैंगस्टर एक्ट में सजा नहीं दी जा सकती, ठोस सबूत जरूरी हैं। - हेमू पंत @ हेमू कालू और अन्य बनाम उत्तराखंड राज्य

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट में सजा रद्द की, 13 साल पुराने मामले में दो आरोपियों को राहत
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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में गैंगस्टर एक्ट के तहत दो व्यक्तियों की सजा रद्द कर दी। अदालत ने कहा कि केवल पुलिस द्वारा तैयार गैंग चार्ट और पुराने आपराधिक मामलों का उल्लेख, किसी व्यक्ति को गैंग का सदस्य साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह अपील हेमू पंत उर्फ हेमू कालू और मनीष उर्फ कंचू मटियानी ने दाखिल की थी। दोनों को नैनिताल की विशेष अदालत ने वर्ष 2013 में उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एंड एंटी सोशल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट, 1986 की धाराओं 2/3 के तहत दोषी ठहराया था।

ट्रायल कोर्ट ने दोनों को तीन-तीन साल की कठोर कैद और ₹10,000 जुर्माने की सजा सुनाई थी।

जस्टिस आशीष नैथानी ने रिकॉर्ड की दोबारा समीक्षा करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि आरोपी किसी संगठित गैंग का हिस्सा थे या लगातार गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल थे।

अदालत ने कहा,

“केवल पुराने मामलों का दर्ज होना या गैंग चार्ट में नाम होना, कानून की आवश्यक शर्तों को पूरा नहीं करता।”

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि अभियोजन पक्ष कोई स्वतंत्र गवाह पेश नहीं कर सका। अधिकतर गवाह पुलिस अधिकारी थे, जिनकी गवाही औपचारिक प्रकृति की थी।

न्यायालय ने कहा कि गैंगस्टर एक्ट जैसे विशेष दंड कानूनों में आरोप साबित करने के लिए सख्त और स्पष्ट सबूत जरूरी हैं।

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हाईकोर्ट ने यह भी देखा कि इसी कथित गैंग के कई अन्य सह-आरोपियों को पहले ही बरी किया जा चुका था। अदालत ने कहा कि जब अन्य आरोपियों को राहत मिल चुकी है, तो वर्तमान अपीलकर्ताओं की दोषसिद्धि के लिए अलग और ठोस आधार दिखना चाहिए था, जो रिकॉर्ड पर नहीं था।

कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोप संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने 19 अगस्त 2013 का ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द कर दिया।

अदालत ने अपील स्वीकार करते हुए दोनों अपीलकर्ताओं को गैंगस्टर एक्ट मामले में बरी कर दिया और उनके जमानती बंधपत्र भी समाप्त कर दिए।

Case Details

Case Title: Hemu Pant @ Hemu Kalu and Another vs State of Uttarakhand

Case Number: Criminal Appeal No. 337 of 2013

Judge: Justice Ashish Naithani

Decision Date: 21 April 2026

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