Logo
Court Book - India Code App - Play Store

advertisement

HP हाईकोर्ट: नाबालिग का आधार पर 18+ दिखाना आरोपी को POCSO मामले में नहीं देगा राहत

Vivek G.

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि नाबालिग लड़की का 18+ होने का दावा या आधार कार्ड में उम्र दिखना आरोपी को POCSO केस में मदद नहीं करेगा; जमानत याचिका खारिज।

HP हाईकोर्ट: नाबालिग का आधार पर 18+ दिखाना आरोपी को POCSO मामले में नहीं देगा राहत

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई नाबालिग लड़की खुद को 18 वर्ष से अधिक बताती है या उसके आधार कार्ड में उसकी उम्र अधिक दिखाई देती है, तब भी यह आरोपी को POCSO (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस) एक्ट के मामले में कोई मदद नहीं करता।

Read in English

यह फैसला न्यायमूर्ति राकेश कैंथला की एकल पीठ ने सुनाया, जिसमें आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी गई। आरोपी पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 363, 376 तथा POCSO एक्ट की धारा 4 के तहत केस दर्ज है।

मामला क्या है

  • यह केस एक FIR दिनांक 20 मई 2024 से शुरू हुआ, जिसे पीड़िता के पिता ने दर्ज करवाया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बेटी, जिसका जन्म अगस्त 2007 में हुआ था, बिना बताए घर से निकल गई।
  • पिता को शक था कि याचिकाकर्ता (आरोपी) ने उसे अगवा कर लिया है।
  • पुलिस ने लड़की को बरामद किया। उसने पहले कहा कि वह अपनी मर्जी से घर से गई थी और आरोपी ने कुछ गलत नहीं किया।
  • लेकिन फॉरेंसिक जांच में यह पाया गया कि पीड़िता के शरीर और कपड़ों से मिले डीएनए नमूने आरोपी के ब्लड सैंपल से मैच हुए।
  • बाद में, पीड़िता ने अपने बयान में जोड़ा कि उसके साथ बलात्कार हुआ था।

Read also:- गुजरात हाईकोर्ट ने वडोदरा में बूटलेगर की रोकथाम हिरासत रद्द की

आरोपी ने नियमित जमानत मांगी और कहा कि:

  • पीड़िता के पास उसका आधार कार्ड था, जिसमें जन्मतिथि 01 जनवरी 2005 लिखी थी, यानी वह बालिग थी।
  • पीड़िता ने खुद भी कहा था कि वह 18 वर्ष से अधिक उम्र की है।
  • इसलिए यह मानने के आधार हैं कि घटना के समय वह नाबालिग नहीं थी।

वहीं, अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि:

  • आरोपी ने एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म किया है, जो गंभीर अपराध है।
  • फॉरेंसिक रिपोर्ट ने इस तथ्य को पुष्ट किया है।
  • अब तक 31 गवाहों में से केवल एक की गवाही हुई है, ऐसे में आरोपी को रिहा करना न्यायपूर्ण सुनवाई को प्रभावित कर सकता है

Read also:- ए. टी. गोयी एंटरप्राइजेज बनाम नंद लाल राठी मामले में सुधार का आदेश कलकत्ता हाईकोर्ट ने दिया

हाईकोर्ट ने आरोपी के सभी तर्क खारिज कर दिए और अहम टिप्पणियाँ कीं:

  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले (Saroj & Ors. v. Iffco-Tokio General Insurance Co., 2024) का हवाला देते हुए न्यायमूर्ति कैंथला ने कहा: "आधार कार्ड जन्मतिथि का सबूत नहीं है। इसलिए 01.01.2005 की एंट्री आरोपी की मदद नहीं कर सकती।"
  • इस दलील पर कि लड़की ने अपनी उम्र गलत बताई थी, कोर्ट ने Reg. v. Prince (1875) मामले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था: "यदि कोई लड़की झूठा कहे कि वह बड़ी है, लेकिन वास्तव में नाबालिग हो, तो भी आरोपी को राहत नहीं मिलेगी।"
  • कोर्ट ने जोर देते हुए कहा: "POCSO एक्ट बच्चों को न केवल दूसरों से बल्कि खुद से भी बचाने के लिए लाया गया था। इस कानून में सहमति (Consent) कोई बचाव नहीं है।"

कोर्ट ने कहा कि फॉरेंसिक सबूत, पीड़िता का नाबालिग होना और ट्रायल की शुरुआती स्थिति को देखते हुए यह जमानत देने लायक मामला नहीं है

Read also:- मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु में अवैध किडनी प्रत्यारोपण घोटाले की जांच के लिए SIT का गठन किया

इसलिए, आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी गई। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियाँ केवल जमानत तक सीमित हैं और केस के मेरिट्स पर असर नहीं डालेंगी।

मामले का शीर्षक: हिमाचल प्रदेश राज्य बनाम [अभियुक्त]

मामले का प्रकार: नियमित ज़मानत आवेदन

तिथि: 20 मई 2024

Advertisment

Recommended Posts