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मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु में अवैध किडनी प्रत्यारोपण घोटाले की जांच के लिए SIT का गठन किया

Prince V.

मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु में अवैध किडनी प्रत्यारोपण घोटाले की जांच के लिए SIT गठित की। अदालत ने अस्पतालों के लाइसेंस रद्द किए और दलालों व अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु में अवैध किडनी प्रत्यारोपण घोटाले की जांच के लिए SIT का गठन किया

मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने 25 अगस्त 2025 को तमिलनाडु में बड़े पैमाने पर अवैध किडनी प्रत्यारोपण और मानव अंगों की तस्करी की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया। यह आदेश अधिवक्ता एस.एन. सतीश्वरन द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर दिया गया, जिसमें सीबीआई जांच की मांग की गई थी।

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याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि धनलक्ष्मी श्रीनिवासन मेडिकल कॉलेज और सेथर अस्पताल, त्रिची सहित कुछ निजी अस्पताल दलालों की मदद से अवैध किडनी व्यापार में शामिल थे। शिकायतें दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। राज्य सरकार ने प्रारंभिक जांच में जाली प्रमाणपत्र और फर्जी दस्तावेज मिलने पर दोनों अस्पतालों के प्रत्यारोपण लाइसेंस पहले निलंबित और बाद में रद्द कर दिए।

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जांच दल ने पाया कि गरीब व्यक्तियों को दलालों द्वारा पैसे का लालच देकर किडनी दान करने के लिए मजबूर किया गया और गलत हलफनामों के आधार पर मंजूरी ली गई।

न्यायमूर्ति एस.एम. सुब्रमण्यम और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने कहा:

“रिपोर्ट चिंताजनक है कि बड़े पैमाने पर मानव अंगों का अवैध तरीके से व्यापार हो रहा है। कानूनी प्रावधानों का दुरुपयोग कर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का शोषण किया गया।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे कार्य संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करते हैं, क्योंकि अंगों की तस्करी सीधे जीवन और सार्वजनिक स्वास्थ्य के अधिकार को प्रभावित करती है।

राज्य के इस तर्क को खारिज करते हुए कि केवल अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 (TOHO Act) के तहत प्राधिकरण ही जांच कर सकता है, अदालत ने कहा कि इस मामले में भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) के तहत भी संज्ञेय अपराध बनते हैं।

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अदालत ने पांच सदस्यीय SIT का गठन किया, जिसकी अगुवाई दक्षिण जोन के पुलिस महानिरीक्षक प्रेमाानंद सिन्हा आईपीएस करेंगे। चार अन्य वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी इसमें शामिल होंगे। SIT को निर्देश दिया गया है कि वह शिकायतों के आधार पर एफआईआर दर्ज करे, दलालों, अस्पतालों और अधिकारियों की भूमिका की जांच करे और 24 सितंबर 2025 तक अपनी पहली रिपोर्ट अदालत में जमा करे।

राज्य मूक दर्शक नहीं बना रह सकता। प्रभावी जांच आवश्यक है ताकि गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के जीवन की रक्षा हो सके, जिनका शोषण इस तरह के अवैध अंग व्यापार से किया जाता है।

Case Title:
W.P.(MD) No. 22623 of 2025 – S.N. Sathishwaran बनाम The Chief Secretary to the Government of Tamil Nadu & Others

Case Number:
W.P.(MD) No. 22623 of 2025 with W.M.P.(MD) No. 17736 of 2025

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