राजस्थान हाईकोर्ट ने एडवोकेट ब्रह्मानंद सांडू की गवर्नमेंट एडवोकेट-कम-अतिरिक्त महाधिवक्ता के रूप में नियुक्ति न होने को लेकर दायर एक स्वतः संज्ञान आपराधिक रिट याचिका को बंद कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह न तो अवमानना है और न ही आपराधिक मामला, बल्कि पूरी तरह एक सेवा से जुड़ा मुद्दा है।
मुख्य न्यायाधीश मानिंद्र मोहन श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति आनंद शर्मा की डिवीजन बेंच ने 2 अप्रैल 2025 को यह आदेश पारित किया। यह मामला 16 अप्रैल 2024 को लिखे गए एक पत्र के आधार पर सामने आया था, जिसमें हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने राज्य सरकार के विधि एवं कानूनी मामलों के विभाग के प्रमुख सचिव को ब्रह्मानंद सांडू की नियुक्ति पर सहमति की सूचना दी थी।
यह भी पढ़ें: समयपूर्व रिहाई मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाई, प्रक्रिया में अनियमितता पर मांगा स्पष्टीकरण
हालांकि, राज्य सरकार द्वारा अब तक इस नियुक्ति का औपचारिक आदेश जारी नहीं किया गया। एकल पीठ ने इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया और इसे आपराधिक रिट याचिका के रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही विधि विभाग के प्रमुख सचिव को मूल रिकॉर्ड सहित व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया गया।
बाद में डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया:
"केवल इस आधार पर कि यह मामला सरकार के अधिवक्ता की नियुक्ति से संबंधित है, और इसके लिए हाईकोर्ट से परामर्श लिया गया था जैसा कि तत्कालीन धारा 24 CrPC के तहत आवश्यक था, इसे आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता। यह मूलतः सेवा से संबंधित मामला है।"
यह भी पढ़ें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों में फर्जी DOB के दावे पर जताई चिंता; JJ एक्ट के तहत सख्त आयु सत्यापन की मांग
कोर्ट ने यह भी कहा:
"हाईकोर्ट से परामर्श के बाद यदि नियुक्ति आदेश जारी नहीं हुआ है, तो यह अवमानना नहीं माना जा सकता।"
राज्य सरकार और हाईकोर्ट की ओर से पेश वकीलों ने तर्क दिया कि यह एक प्रशासनिक प्रकिया है। हाईकोर्ट ने केवल सहमति दी थी, जबकि अंतिम निर्णय सरकार को लेना था।
ब्रह्मानंद सांडू, जो खुद भी उपस्थित थे, ने कहा कि उन्हें पता है कि उनके नाम की सिफारिश की गई थी, लेकिन उन्हें यह नहीं बताया गया कि अब तक नियुक्ति क्यों नहीं हुई।
यह भी पढ़ें: ओटीटी रेगुलेशन याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कहा - यह नीति से जुड़ा विषय है
अंत में, कोर्ट ने कहा:
"यदि किसी व्यक्ति के मामले में परामर्श प्रक्रिया अपनाई गई और फिर भी उसकी नियुक्ति नहीं हुई, तो यह केवल व्यक्तिगत शिकायत है। ऐसा व्यक्ति यदि चाहे, तो उचित याचिका दायर कर कोर्ट का रुख कर सकता है।"
कोर्ट ने स्वतः संज्ञान याचिका को बंद कर दिया और यह स्पष्ट किया कि ब्रह्मानंद सांडू यदि चाहें तो कानून के तहत उपलब्ध किसी भी उपाय को अपना सकते हैं।
केस का शीर्षकः स्वप्रेरणा बनाम मुख्य सचिव, राजस्थान सरकार एवं अन्य।